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पीयू के छात्रों ने भी किसान आंदोलन को दी थी धार, खोल दिया था पुस्तकालय

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चंडीगढ़। कृषि कानूनों की वापसी को लेकर सिंघु बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन को धार देने में पीयू के छात्रों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंदोलन के मध्य ही लोगों के लिए पढ़ने को पुस्तकालय खोल दिया, जो 12 माह से लगातार चल रहा है। कृषि बिल वापसी की घोषणा से वह खुश हैं। कहते हैं कि एक तो यह होना ही था। जनता की अदालत सबसे बड़ी है। इस आंदोलन ने और लोगों को प्रेरणा दी है। वह भी अपने हकों के लिए संघर्ष करेंगे।
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लोगों ने खूब पढ़ीं किताबें (फोटो)
आंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन (एएसए) के पदाधिकारी एसोसिएशन के चेयरमैन गुरदीप के नेतृत्व में सिंघु बॉर्डर पर जमे हुए हैं। बारी-बारी से पदाधिकारी वहां पहुंचे। आंदोलन शुरू होने के कुछ दिन बाद ही उन्होंने पुस्तकालय वहां खोल दिया था, जो आज तक चल रहा है। कृषि कानून वापसी पर चेयरमैन गुरदीप कहते हैं कि यह संघर्ष की जीत है। जनता की अदालत सबसे बड़ी अदालत है। इस संघर्ष से तमाम लोगों को प्रेरणा मिली है। वह भी आगे बढ़ेंगे।
बीमार हुए लेकिन संघर्ष से बड़ी बीमारी नहीं थी (फोटो)
एएसए के अलावा आइसा के पदाधिकारी भी एक साल से इस आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। पीयू से आइसा अध्यक्ष रहे विजय कुमार कहते हैं कि आंदोलन के दौरान वह कुछ समय बीमार रहे, लेकिन संघर्ष में यह बीमारियां छोटी हो जाती हैं। बारिश में भी कई बार भीगे। बारी-बारी से संगठन के कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदारी संभाली। आज उसी मेहनत का नतीजा सामने है। केंद्र सरकार को बिल वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। ऐसे संघर्ष के लिए वह लोग भी आगे आए जो कभी दबाव के कारण बाहर नहीं निकले। छात्र अमन रतिया भी यही बात कहते हैं।
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गीत, संगीत के जरिए किसानों में भरा जोश (फोटो)
एसएफएस का भी इस आंदोलन में बड़ा योगदान रहा। यह भी एक साल से वहां जमे हुए हैं। पीयू छात्र संदीप कुमार का कहना है कि कविता, कहानियों, संगीत आदि के जरिए उनके पदाधिकारियों ने वहां के लोगों में जोश भरा है। किसानों की मांग जायज थी और आज उसी की जीत हुई। संघर्ष बेकार नहीं जाता। पीयू में भी एसएफएस के पदाधिकारियों ने कई बार किसानों के समर्थन में कृषि बिलों का विरोध किया। इस आंदोलन में पीयू छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष कनुप्रिया आदि ने भी भाग लिया था। काफी समय से वह आंदोलन में ही अपनी भूमिका अदा कर रही हैं। राजविंदर से लेकर कई छात्रों ने वहां संघर्ष किया।
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