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नवजोत पर बोले सीएम चन्नी: मुझे उनके इस्तीफे की जानकारी नहीं, अगर नाराज हैं तो बात करूंगा

Tue, 28 Sep 2021 04:04 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मंगलवार को चंडीगढ़ में चन्नी ने प्रेस कांफ्रेंस कर किसानों की हालत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि किसानों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है लेकिन केंद्र अप्रभावित है। मैं पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में केंद्र से तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपील करना चाहता हूं। 
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चरणजीत चन्नी। - फोटो : ANI
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विस्तार
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नवजोत सिद्धू के इस्तीफे पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि यदि वे नाराज हैं तो उनसे बात करेंगे। वे हमारे पार्टी प्रधान हैं और अच्छे नेता हैं। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह के दिल्ली दौरे पर कैप्टन ने कहा कि कोई गल नहीं, कैप्टन साहब हमारे सीएम रहे हैं। वह पंजाब के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए दिल्ली गए होंगे।

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मंगलवार को चंडीगढ़ में चन्नी ने प्रेस कांफ्रेंस की और किसानों की हालत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि किसानों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है लेकिन केंद्र अप्रभावित है। मैं पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में केंद्र से तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपील करना चाहता हूं। चन्नी ने साफ कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि कानून रद्द नहीं किए तो पंजाब विधानसभा का सत्र बुलाकर रद्द करेंगे।

यह भी पढ़ें - पंजाब कांग्रेस का घमासान: सिद्धू 72 दिन के प्रदेश अध्यक्ष, लिखा- पंजाब के भविष्य से समझौता नहीं करूंगा 
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इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद के आह्वान के मद्देनजर अपने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई थी और मंत्रिमंडल में प्रस्ताव पास कर किसानों और उनकी मांगों के प्रति एकजुटता प्रकट की थी। 
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तीनों कृषि कानूनों को किसान विरोधी और खाद्य सुरक्षा विरोधी करार देते हुए चन्नी ने कहा था कि यह कानून किसानों की रोजी-रोटी और उनकी भावी पीढ़ियों के लिए खतरा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कानूनों को रद्द करने संबंधी पंजाब विधानसभा द्वारा पास किए प्रस्तावों को भारत सरकार को तुरंत स्वीकार करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पंजाब विधानसभा के 28 अगस्त, 2020 और 20 अक्टूबर, 2020 को पास किए गए प्रस्तावों के प्रति स्पष्ट रूप में प्रतिबद्धता दोहरा चुकी है और इस बात पर जोर दिया कि किसानों की सभी जायज मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए। 

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