जालंधर लोकसभा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक पूर्व कांग्रेसी के सहारे ही कांग्रेस का किला ढहा दिया। आप उम्मीदवार सुशील रिंकू ने कांग्रेस उम्मीदवार करमजीत कौर चौधरी को करारी शिकस्त दी।
अपने सियासी गुरु पूर्व कांग्रेस मंत्री व मौजूदा विधायक राणा गुरजीत सिंह से सियासत के सारे गुर सीखकर सुशील कुमार रिंकू उनको ही घर पर पटखनी देने में कामयाब हो गए। चुनाव में भी रिंकू हमेशा कहते थे कि राणा मेरे पिता समान हैं, मेरे सियासी गुरु हैं, जिनसे मैंने राजनीति सीखी है। शनिवार को चुनाव नतीजों ने साबित कर दिया कि रिंकू सियासत में माहिर हो चुके हैं और उन्होंने अपने गुरु से सीखे दांव-पेच ठीक से आजमाए। उनके पैंतरों का इस्तेमाल कर रिंकू ने पहले जालंधर से आम आदमी पार्टी की टिकट हासिल की और फिर जीत दर्ज की।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी पूरा चक्रव्यूह रचा था कि कैसे रिंकू को घेरा जाए, इसलिए कांग्रेस ने राणा गुरजीत सिंह को ही जालंधर लोकसभा सीट का इंचार्ज लगा रखा था। राणा गुरजीत राजनीति के माहिर माने जाते हैं। पिछले साल 2022 में 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा एक मात्र आजाद उम्मीदवार उनके बेटे राणा इंद्रप्रताप सिंह ही जीत पाए थे। राणा इंद्रप्रताप सिंह ने सुल्तानपुर लोधी में कांग्रेस के उम्मीदवार नवतेज चीमा को शिकस्त दी थी। राणा गुरजीत सिंह ने हमेशा रिंकू को अपना बेटा कहकर पुकारा है और हमेशा उसको राजनीति में अपने साथ रखा है।
पार्षद से सांसद का सफर
रिंकू पहले कांग्रेस के पार्षद होते थे, जिन्होंने जालंधर वेस्ट से टिकट लेने के लिए जोर लगा रखा था। 2017 में रिंकू ने सियासी गुरु का साथ लेकर पंजाब के शक्तिशाली नेता और राहुल गांधी व सोनिया गांधी तक सीधी पहुंच रखने वाले मोहिंदर सिंह केपी का टिकट कटवा दिया था। रिंकू से इस पटखनी पर पूछा गया, तो वह मुस्कराने लगे बोले कि सियासत जिंदगी का एक हिस्सा है, लेकिन राणा गुरजीत सिंह का आदर व सत्कार उनके दिल में है।