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भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम: हरियाणा में रिश्वत लेते पकड़े जाने पर IAS व IPS की होगी सीधे गिरफ्तारी, नहीं लेनी पड़ेगी किसी की अनुमति

Tue, 26 Apr 2022 12:35 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नए आदेश के तहत आईएएस, आईपीएस, एचसीएस और एचपीएस समेत कोई भी अधिकारी विजिलेंस के ट्रैप (जाल) में पकड़ा जाता है तो उसे तुंरत गिरफ्तार किया जा सकेगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा में अब रिश्वत लेते पकड़े जाने पर आईएएस और आईपीएस को विजिलेंस सीधे गिरफ्तार कर सकेगी। इसके लिए किसी की मंजूरी नहीं लेनी होगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है।

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मुख्य सचिव संजीव कौशल ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। अभी तक भारतीय प्रशासनिक व पुलिस सेवा के अधिकारियों की गिरफ्तारी से पहले संबंधित विभागाध्यक्ष या मुख्य सचिव से अनुमति लेनी पड़ती थी। 

इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था और किसी ने किसी तरीके से भ्रष्ट अधिकारी बच निकलते थे। अब सरकार ने नियमों में बदलाव कर भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकंजा और कड़ा कर दिया है। नए आदेश के तहत आईएएस, आईपीएस, एचसीएस और एचपीएस समेत कोई भी अधिकारी विजिलेंस के ट्रैप (जाल) में पकड़ा जाता है तो उसे तुंरत गिरफ्तार किया जा सकेगा।

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ड्यूटी मजिस्ट्रेट व छाया गवाह के लिए लेनी होगी अनुमति: किसी भी अधिकारी व कर्मचारी पर घात लगाने के मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट और छाया गवाह की आवश्यकता पहले की तरह जारी रहेगी। जिलाधीश लिखित नियुक्ति करेंगे। सरकार का कहना है कि ड्यूटी मजिस्ट्रेट और छाया गवाह लगाना एक प्रतीकात्मक व्यवस्था है। यह किसी भी प्रकार की सक्षम अधिकारी की पूर्ण अनुमति नहीं है। इसके लिए 15 अक्तूबर 2018 के नियम लागू रहेंगे।

सीबीआई के चार अधिकारी नियुक्त कर चुकी सरकार: सतर्कता ब्यूरो को हरियाणा सरकार लगातार मजबूत कर रही है। इसी के तहत सरकार ने पिछले दिनों कई अहम फैसले लिए हैं। विजिलेंस ब्यूरो में सीबीआई के सेवानिवृत्त चार अधिकारियों को नियुक्त कर चुकी है। साथ ही मंडलायुक्त और डीआईजी विजिलेंस को एक करोड़ रुपये तक के भ्रष्टाचार के मामले में जांच कर सकेंगे। इतना ही नहीं भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में मंडलायुक्त बोर्ड और निगमों अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए अधिकार दिए जा चुके हैं। उधर, विजिलेंस महानिदेशक सरकार से ब्यूरो के लिए 550 कर्मचारी मांग चुके हैं। 
 
ट्रैप के मामले में किसी भी स्तर के अधिकारी की गिरफ्तारी के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं होगी। अन्य मामलों में पूर्व अनुमति लेनी पड़ेगी। सरकार ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए पीसी एक्ट में धारा-17ए जोड़ दी है। - संजीव कौशल, मुख्य सचिव, हरियाणा
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