राजपुरा की जसप्रीत पहुंचीं यूक्रेन
सात दिन भूखी प्यासी जसप्रीत आखिरकार यूक्रेन के दहशत भरे माहौल से निकलकर पोलैंड पहुंच गई। पोलैंड पहुंचते ही जब जसप्रीत ने कॉल अपने परिवार को की तो परिजनों ने राहत की सांस ली। जसप्रीत कौर के पिता घनौर के उलाणा निवासी बिंदरपाल सिंह व माता सुरिंदर कौर ने बातया कि नवंबर-2021 में बेटी जसप्रीत कौर को यूक्रेन की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी (खारकीव) में पढ़ने भेजा था।
साढ़े तीन माह बाद ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ गया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी और साथियों ने यूनिवर्सिटी के बेसमेंट में शरण ली। दो से तीन दिन तक तो वह कुछ खा नहीं सकी। हमने कॉल किया तो पता चला कि चारों ओर बमबारी हो रही है और सारे रास्ते बंद हैं। मेरे साथ भारतीय दोस्त होने की वजह से कुछ राहत भी रही। लगातार हो रहे धमाकों से कलेजा कांप उठा।
गुरुवार रात को बेटी पहुंची पोलैंड
बिंदरपाल सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे मेरी बेटी जसप्रीत और उसकी दोस्त खारकीव के बंकर से निकलकर 20 किमी पैदल चलकर बुक्साल के रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन में सारी रात सफर कर गुरुवार की शाम चार बजे वह यूक्रेन के अंतिम शहर लवीव में पहुंची। यहां से उन्होंने टैक्सी ली और भारतीय झंडा लगाकर रात 8.30 बजे के करीब पोलैंड पहुंची। वहां शेल्टर में भारतीय लोगों ने उनका जबरदस्त स्वागत किया तो हमारी परेशानी काफी हद तक खत्म हो गयी। उन्होंने कहा कि अब जसप्रीत रविवार को गांव उलाणा पहुंच जाएगी।
लोन पर पैसे लेकर बेटी को भेजा था यूक्रेन
बिंदरपाल सिंह ने बताया कि वह चंडीगढ़ में होमगार्ड के पद पर तैनात हैं। उनकी इच्छा थी कि वह अपनी बेटी को डॉक्टर बनाएं। उन्होंने मेडिकल यूनिवर्सिटी (खारकीव) में 14 लाख रुपये लोन पर पैसे लेकर जमा करवा दिए थे। तीन माह बाद ही बेटी को वापस आना पड़ गया। उन्होंने सरकार से अपील की है कि यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा लेने वाले सभी शिक्षार्थियों को कम रेट या सब्सिडी पर उनकी शिक्षा पूरी करवाएं। जिससे जो सपने उनके परिजनों ने देखे वह पूरे हो सकें। उन्होंने भारत सरकार का धन्यवाद दिया और कहा कि देश के 20 हजार विद्यार्थियों को यूक्रेन से निशुल्क भारत लाने का कार्य सराहनीय है।