चंडीगढ़ में ईद उल फितर की नमाज के बाद मंगलवार को दुआओं के लिए हजारों हाथ एक साथ उठे। शहर की सभी मस्जिदों और ईदगाहों में ईद की नमाज हुई। नमाज से पहले रमजान और रोजा के महत्व को बताया गया। सेक्टर 20 की जामा मस्जिद , सेक्टर 26 की नूरानी मस्जिद सहित तमाम मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा की। लोगों ने एक दूसरे का गले मिलकर ईद मुबारक कहा।
सेक्टर 20 के जामा मस्जिद के इमाम खतीब मौलाना अजमल खान ने नमाज से पहले रमजान और ईद के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने ईद का संदेश देते हुए कहा कि आपसी भाईचारा कायम रखते हुए कौमी एकता को मजबूत बनाएं और मजहब से ऊपर उठकर मिलजुलकर ईद के त्योहार की खुशियां बांटे।
सेक्टर 26 के नूरानी मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि रब की इबादत इंसानियत से मोहब्बत और मानव से मानव के मिलन के मुबारक माह के मुकम्मल रोजों की समाप्ति के बाद ईद मनाई जाती है। लोगों में रोजा के मुक्कमल होने पर खुशी और भरपूर उत्साह है। दो साल की कोविड की प्रतिबंधों के पूरी तरह से हट जाने के बाद इस बार मस्जिदों में काफी भीड़ रही। कासमी ने कहा कि ईद का संदेश मानव कल्याण ही है। मुल्क में शांति, खुशहाली व शांति की दुआएं मांगी गई।
उन्होंने कहा कि रमजान का पवित्र महीना वास्तव में अपने गुनाहों से मुक्त होने, उनसे तौबा करने और अल्लाह से डरने व मन और हृदय को शांति और पवित्रता देने वाला है। रोजा रखने से इंसान के अंदर संयम पैदा होता है। एक तरह से त्याग एवं संयममय जीवन की राह पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इस लिहाज से यह रहमतों और बरकतों का महीना है। ईद की नमाज से पहले दाना निकाला जाता है ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशी में बराबर के भागीदार रहे।