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चेतावनी का असर... बच्चों के टीकाकरण ने पकड़ी रफ्तार

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चंडीगढ़। बच्चों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे कोरोना टीकाकरण अभियान के अंतर्गत शुरुआती दौर में निराशाजनक परिणाम से स्वास्थ विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी। अब जागरुकता अभियान और प्रशासन की अपील का असर अभिभावकों पर व्यापार स्तर से होने लगा है। इसके तहत 12 से 14 साल के बच्चों के चरण में लाभार्थियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। आलम यह है कि अस्पतालों और स्कूलों में बनाए गए टीकाकरण केंद्रों पर लाभार्थियों को टीका लगाने के लिए टीमें कम पड़ रही हैं। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विभाग को नई टीमों का गठन करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा भीड़ जीएमएसएच-16 व सुखना लेक पर बनाए गए केंद्र पर हो रही है। महज सात दिन में 26789 बच्चों ने टीका लगवा लिया है। अब 69.3 प्रतिशत बच्चों को प्रतिदिन टीका लग रहा है। वहीं 4188 बच्चों को दूसरी डोज लग चुकी है। बच्चों की संख्या भी 3.79 प्रतिशत से बढ़कर 9.31 प्रतिशत पर आ गई है। 25 अप्रैल को 12-14 साल के लाभार्थियों की संख्या 17478 थी
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गौरतलब है कि प्रशासक के सलाहकार ने टीका न लगवाने वाले बच्चों को 4 अप्रैल से स्कूलों में प्रवेश न देने का आदेश दिया है। परिजन बच्चों की स्कूल की छुट्टी के बाद सीधे वहां ही उन्हें टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में टीका लगवाने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे परेशानी हो सकती है इसलिए स्कूल की बजाय अस्पताल में या शाम को सुखना लेक टीका लगवाने का निर्णय लिया। उधर, सोमवार को सुखना लेक के टीकाकरण केंद्र पर टीकाकरण करने वाली टीम के सदस्य बिना मास्क के नजर आए, लेकिन बच्चे मास्क पहले हुए थे। वहीं अस्पताल प्रशासन ने भी मौजूदा जरूरत को ध्यान में रखते हुए अपनी 70 प्रतिशत ताकत बच्चों के टीकाकरण में लगा दी है। प्रशासक के सलाहकार ने 15 मई तक विभिन्न उम्र वर्ग में चलाए जा रहे बच्चों के अभियान को शत प्रतिशत पूरा करने को कहा है। उनके निर्देश के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। एक तरफ स्कूल प्रबंधन बच्चों और अभिभावकों को जागरूक कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण केंद्रों को मजबूती देने में जुटा है।
कोट
बच्चों के टीकाकरण की रफ्तार परीक्षा के कारण काफी धीमी थी। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग ने उस दौरान बच्चों को कोई दबाव नहीं बनाया क्योंकि ये उनके तनाव का कारण बन सकता था। अब स्थिति पहले से काफी बेहतर है। टीकाकरण का परिणाम उम्मीद से भी बेहतर है। अगर यही हाल रहा तो चंद दिनों में इस उम्र का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
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-डॉ. मंजीत सिंह, राज्य टीकाकरण अधिकारी
क्या कहते हैं अधिकारी
टीकाकरण ही मुख्य हथियार
शहर के जिन लोगों ने अभी तक कोरोना वैक्सीन का टीका नहीं लगाया है उन्हें सलाह देता हूं कि वह जल्द से जल्द टीका लगवाए। कोरोना को मात देने में टीकाकरण ही सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। मैं परिजनों से भी आग्रह करता हूं कि वह अपने बच्चों का टीकाकरण जल्द से जल्द पूरा करें। भविष्य में अगर कोरोना वायरस का खतरा फिर पैदा होता है तो टीका लगवाने वाले गंभीर खतरे से दूर होते हैं। टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए यूटी प्रशासन कई तरह के अभियान चला रहा है। लोगों का भी फर्ज बनता है कि वह आगे आएं।
-धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक
टीकाकरण अभियान को सफल बनाना हम सबका कर्तव्य
कोरोना जैसी महामारी को किसी हथियार से नहीं रोका जा सकता। इस पर अगर विजय प्राप्त करनी है तो हम सबको मिलकर टीकाकरण अभियान को सफल बनाने का दृढ़ संकल्प लेना होगा। कहते हैं कि बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं। ऐसे में हम अपने भविष्य को महामारी के चंगुल में कैसे फंसने दे सकते हैं। मेरी अपील है कि चंडीगढ़ के प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चों को टीका लगाने का संकल्प लें और उसे हर हाल में पूरा करें, तभी हम शहर और देश को इस संक्रमण से सुरक्षित करने में सफल साबित होंगे।
-ओमवीर विश्नोई, आईजी चंडीगढ़
उम्मीद के अनुसार मिलने लगा परिणाम
कोरोना महामारी से बचाव के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में चंडीगढ़ ने वयस्कों के लक्ष्य को तय समय से पहले पूरा करके आदर्श स्थापित कर चुका है। ऐसे में हम बच्चों के अभियान में पीछे कैसे रह सकते हैं। शुरुआती दौर में बच्चों के टीकाकरण को लेकर अभिभावकों ने अनदेखी की थी लेकिन अब वे इसे गंभीरता से ले रहे हैं। इसकी पुष्टि बढ़ते परिणाम से साफ तौर पर हो रही है। यह संक्रमण बढ़ने के दौरान राहत का संकेत है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द से जल्द शहर के शत-प्रतिशत चिह्नित बच्चों का टीकाकरण कर लिया जाएंगे।
-यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव
अभियान को सफल बनाना प्रत्येक नागरिक का दायित्व
बच्चों के टीकाकरण अभियान की सफलता का दायित्व सिर्फ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर नहीं बल्कि शहर के प्रत्येक नागरिक पर है। एक अभिभावक होने के नाते अगर हम अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर त्वरित निर्णय नहीं कर सकते तो फिर यह बेहद निराशाजनक है। मौजूदा समय में सरकार ने बच्चों के लिए टीके के महत्व को समझते हुए उसे सरकारी अस्पतालों में सुलभ किया है। इसके बावजूद अगर बच्चों को टीका लगवाने में लापरवाही की जा रही है तो वह निराशाजनक है। अभिभावकों को इसमें उत्साह पूर्ण रवैया दिखाना होगा जिससे बच्चों को जल्द से जल्द टीके के सुरक्षा घेरे में लाया जा सके।
-आनिंदिता मित्रा, कमिश्नर नगर निगम
अभिभावक बच्चों के टीकाकरण के लिए आगे आएं
अभिभावकों से अपील है कि वे अपने बच्चों के टीकाकरण के लिए आगे आएं। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि अभिभावकों के साथ बैठकें आयोजित की जाएं और बच्चों के टीकाकरण के लिए उन्हें जागरूक करें। स्कूल कक्षाओं और प्रार्थना सभा में भी बच्चों को टीकाकरण के लिए बोला जा रहा है। -डॉ. पालिका अरोड़ा, शिक्षा निदेशक, यूटी
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