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चंडीगढ़: टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लैबोरेटरी पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कहा-भारत हर चुनौती का सामना करने को तैयार

Thu, 28 Oct 2021 01:45 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हमेशा से एक शांतिप्रिय देश रहा है और आज भी है। किसी भी विवाद को अपनी तरफ से शुरू करना हमारे मूल्यों के खिलाफ है।
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चंडीगढ़ पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हमेशा से एक शांतिप्रिय देश रहा है और आज भी है। किसी भी विवाद को अपनी तरफ से शुरू करना हमारे मूल्यों के खिलाफ है। लेकिन जरूरत पड़ी तो हमारा देश किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। हम देश को सशक्त बनाना चाहते हैं, ताकि दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत के सामने आंख झुकाकर नहीं आंख मिलाकर बात करने की स्थिति में हों।

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राजनाथ सिंह गुरुवार को पंचकूला के रामगढ़ स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (टीबीआरएल) में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले, उन्होंने संवर्धित पर्यावरणीय परीक्षण सुविधा का उद्घाटन भी किया। साथ ही मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीए) एमके-11 टीबीआरएल विकसित वारहेड के लिए प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड, नागपुर को सौंपा गया।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम कहते थे कि दुनिया में भय का स्थान नहीं है। एक शक्ति ही दूसरी शक्ति का सम्मान करती है। आज की परिस्थितियों में सुरक्षा और ताकत के लिए प्रौद्योगिकी और तकनीक का अहम योगदान है।

टीबीआरएल ने अगस्त में सेना को सौंपा डिजाइन मल्टी मोड हैंड ग्रेनेड 
टीबीआरएल वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को सलाम करते हुए सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना हमारा लक्ष्य है। अगस्त माह में ही टीबीआरएल द्वारा डिजाइन मल्टी मोड हैंड ग्रेनेड सेना को सौंपा गया है। यह पहला युद्धपोत था जो निजी उद्योग द्वारा तैयार किया गया। इस ग्रेनेड ने विश्व स्तर पर सुरक्षा और प्रदर्शन मामले में 99.5 प्रतिशत से अधिक विश्वनीयता हासिल की है। भविष्य में भी स्वदेशी प्रणालियों को नियमित रूप से शामिल किया जाता रहेगा। इनके निर्माण में निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जाएगी। उद्योगपति एनएन नुवाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह विदेशों को एक ग्रेनेड 7500 रुपये में और हमें 3500 रुपये में देते हैं। वैज्ञानिकों में जोश भरते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि देश को उन पर नाज है, वे एडवांस तकनीक ट्रायल जारी रखें, मंत्रालय की ओर से किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी।

सीमाओं पर चुनौतियां का सामना करने को प्रौद्योगिकी की जरूरत : रावत
सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि हमें टीबीआरएल पर बहुत गर्व है क्योंकि आप जिस तरह का काम कर रहे हैं, उससे हमारे सशस्त्र बलों को सक्षम बनने में मदद मिलेगी। अभी हमारे सामने सीमाओं पर चुनौतियां हैं। इनका सामना करने के लिए हमें उच्च प्रौद्योगिकी प्रणाली की आवश्यकता है जो सभी तीनों सशस्त्र बलों की क्षमता को और बढ़ा सके। हमारे प्रतिद्वंद्वी युद्ध में बहुत तेजी से प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए हमारे लिए भी उनका सामना करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना आवश्यक है।
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107 करोड़ से तैयार पर्यावरणीय लैब
टीबीआरएल में 107 करोड़ रुपये की लागत से संवर्धित पर्यावरणीय परीक्षण सुविधा शुरू हो गई है। अब कोई भी मिसाइल या फिर बारूद से संबंधित हथियार को यहां पर टेस्ट किया जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने उदाहरण के तौर पर बताया कि एक मिसाइल का ठंडे इलाके लेह लद्दाख और गर्म क्षेत्र राजस्थान में कैसा असर रहेगा, यह लैब में जांचा जाएगा। लैब में मौसम, तामपान, नमी समेत हवा संबंधित परीक्षण होंगे, ताकि अलग अलग क्षेत्रों के हिसाब से उसकी मारक क्षमता का पता लग सके।  

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