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साइबर क्राइम : राजस्थान का भरतपुर बना साइबर ठगी का गढ़, 10वीं पास चला रहे रैकेट

Fri, 25 Dec 2020 01:22 PM IST
निवेदिता वर्मा अमित गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़
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साइबर क्राइम - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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चंडीगढ़ में बढ़ रहे साइबर अपराध पर शिकंजा कस पाना साइबर सेल के लिए नामुमकिन हो रहा है। पहले साइबर अपराध का खेल झारखंड के जामताड़ा से चलता रहा है, लेकिन अब ठगों ने अपना अड्डा राजस्थान के भरतपुर के अलावा अलवर के कुछ कस्बों व गांवों में बना लिया है। 

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चंडीगढ़ साइबर सेल के अनुसार, ज्यादातर ठगी के मामले भरतपुर और अलवर के इलाके से संचालित हो रहे हैं। ऑनलाइन ठगी में 90 फीसदी अपराधी इसी क्षेत्र से हैं। इनमें सबसे ज्यादा साइबर अपराध खुद को आर्मी का जवान बताकर ओएलएक्स पर ठगी, नौकरी दिलवाना, ऑनलाइन डेटिंग एप, बैंक अधिकारी बनकर खाते से रुपये उड़ाना शामिल है। 


ये शातिर ठग साइबर पुलिस की जांच भटकाने के लिए झारखंड के जामताड़ा, पश्चिम बंगाल का 24 परगना, बिहार के अलग-अलग शहरों समेत दिल्ली के बैंक खाते और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। चंडीगढ़ साइबर पुलिस ने जब इन ठगों के नंबरों को खंगाला तो इनका जाल राजस्थान के भरतपुर स्थित पाडला, कामां, पहाड़ी, झीलपट्टी, गढ़ी, कल्याणपुर, चुलेहरा और काहरिका के अलावा अलवर जिले के कुछ कस्बे और गांवों तक फैला मिला। 
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यह सारा इलाका तकरीबन 20 से 25 किलोमीटर के एरिया में है। हैरानी की बात है कि जब साइबर पुलिस इन ठगों को पकड़ने पहुंचती है तो पूरा एरिया इकट्ठा हो जाता है, जिससे ठगों को भागने में मदद मिलती है। साइबर पुलिस के अनुसार भरतपुर स्थित पाडला साइबर ठगों का गढ़ है। 

बैंक खाते तक खरीद लेते हैं ठग 

महज 10वीं से 12वीं पास ये ठग इतने शातिर हैं कि जामताड़ा समेत अन्य राज्यों से भोले भाले लोगों से संपर्क कर इनका बैंक खाता या तो खरीद लेते हैं, या फिर खातों में आने वाले रुपये में दस फीसदी के हिसाब से उन्हें पेमेंट कर देते हैं ताकि साइबर पुलिस की जांच जामताड़ा तक अटकी रहे। 

इन ठगों के ज्यादातर सिम पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में पंजीकृत होते हैं। यहां फर्जी आईडी से मिलने वाले सिम की कीमत 1500 से 2000 रुपये तक होती है। आरोपी दर्जनों के हिसाब से सिम खरीद लेते हैं। 

इन जगहों से ऐसे चलता है ठगी का खेल 
पिछले करीब एक साल से ऑनलाइन नौकरी, कस्टमर केयर, बैंक अधिकारी के अलावा ओएलएक्स पर ठगी के मामले करीब 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ठग ओएलएक्स पर डाले गए विज्ञापन के नंबरों पर संपर्क कर खुद को आर्मी जवान बताने के अलावा अलग-अलग झांसा देकर लोगों से पेटीएम, गूगल-पे, फोन पे के अलावा अन्य तरीका अपनाकर ठगी करते हैं। 

बच्चे और महिलाएं आ जाती हैं आगे 
साइबर सेल जनवरी 2020 से अब तक अलग-अलग मामलों में 30 ठगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। बताया गया कि इनमें एक महिला समेत ऐसे करीब छह शातिर राजस्थान के रहने वाले हैं, जोकि अलग तरीकों से लोगों को अपना ठगी का शिकार बनाते थे, जबकि कुछ महीने पहले भरतपुर के खोह थाना क्षेत्र के गांव कल्याणपुर, चुलेहरा और काहरिका के अलावा अन्य जगहों पर दिल्ली, रोहतक समेत अन्य पुलिस पर हमला भी हो चुका है। चंडीगढ़ साइबर पुलिस भी इन ठगों को गिरफ्तार करने राजस्थान पहुंची है, लेकिन गांव के बच्चे और महिलाएं आगे आ जाती हैं। लोगों के इकट्ठा होने के कारण कई बार टीम को बैरंग लौटना पड़ा है।
 
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लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत : विशेषज्ञ
साइबर विशेषज्ञ राजेश राणा का कहना है कि शातिर ठगों की नजर हमेशा आपके बैंक खातों पर रहती है, लेकिन अगर कुछ बातों को ध्यान में रखा जाए तो ठगी को रोका जा सकता है। इन बातों का रखें ध्यान..
1- ऑनलाइन खरीदारी में हमेशा कैश ऑन डिलीवरी पेमेंट करने का ऑप्शन चुनें।
2- किसी भी अंजान को अपना ओटीपी न बताएं। 
3- बैंक खातों में होने वाली समस्याओं को उनकी ही वेबसाइट से हल करें।
4- कंपनी की वेबसाइट पर दिए गए नंबर से ही कस्टमर केयर से संपर्क करें।
5- लुभावने लिंक को खोलने से हमेशा बचना चाहिए।
6- ऑनलाइन खरीदारी के वक्त उसी साइट का इस्तेमाल करें, जिसके बारे में आप जानते हैं।
7- खाते से लगातार पैसे कट रहे हैं तो कार्ड को तुरंत ब्लॉक करवाएं।
8- ठगी होने पर तुरंत मामले की सूचना साइबर सेल और पुलिस को दें। 

झारखंड के बाद अब राजस्थान साइबर ठगों का नया गढ़ बन चुका है। थोड़ी-थोड़ी दूर पर कुछ गांव बसे हैं, जिसमें ज्यादातर लोग ठगी के मामले में शामिल रहते हैं। -रश्मि यादव, डीएसपी साइबर सेल, चंडीगढ़।

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