अभ्यर्थियों ने बताया कि जनवरी 2020 में मेरिट सूची के जारी होने के बाद फरवरी 2020 में कई चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच और मेडिकल भी हुआ, लेकिन इस बीच कोरोना के दस्तक दे दी और फिर पूरी प्रक्रिया रुक गई। अब जब सब कुछ सामान्य हो चुका है, तो भी उनकी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। वह अब कभी सीटीयू के अधिकारी तो कभी यूटी सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं। उनकी क्या गलती है, उन्होंने तो फीस भरी है, परीक्षा पास की है। इसे लेकर अब युवाओं ने सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया है और प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को टैग कर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नौकरी के इंतजार में अन्य परीक्षाओं के लिए भी तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
परीक्षा में बैठने के लिए रखी गई थी पुरानी नौकरी छोड़ने की शर्त
392 अभ्यर्थियों की मेरिट सूची में शामिल एक अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा में बैठने से पहले सीटीयू ने एक शपथपत्र भी लिया था कि वह कहीं अन्य जगह नौकरी नहीं करते हैं। इस नियम की वजह से सैकड़ों युवाओं ने अपनी नौकरी छोड़ी और फिर इस परीक्षा में बैठे। अब वह सभी बेरोजगार हैं और जिनका चयन हुआ है, उन्हें भी नौकरी नहीं दी जा रही है। इनकी मांग है कि रुकी हुई प्रक्रिया को तत्काल शुरू किया जाए और सभी को नियुक्ति दी जाए।
यह पूरा मामला क्या है, मुझे देखना पड़ेगा। उसके बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। अगर आउटसोर्स पर भर्ती निकली थी तो क्यों पूरी नहीं हुई, यह भी देखा जाएगा। -धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक