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चंडीगढ़: 392 अभ्यर्थी पिछले 19 महीनों से कर रहे थे नौकरी का इंतजार, सीटीयू ने वेबसाइट से मेरिट सूची ही हटा दी 

Sat, 14 Aug 2021 12:29 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जुलाई 2019 में सीटीयू ने आउटसोर्स पर 250 कंडक्टरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ समेत कई राज्यों के 6364 युवाओं ने फॉर्म भरा और सीटीयू ने सभी से 450 रुपये व 50 रुपये बैंक फीस के रूप में लिए।
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CTU - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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युवाओं को रोजगार देने के बजाय चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। 19 महीने पहले जिन 392 अभ्यर्थियों के सीटीयू ने मेरिट सूची जारी कर मेडिकल व अन्य दस्तावेज जमा कराए थे, अब उन्हें रोजगार देने से बचा जा रहा है। जब युवाओं का दबाव पड़ा तो विभाग ने अपनी वेबसाइट से मेरिट सूची ही हटा दी।
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जुलाई 2019 में सीटीयू ने आउटसोर्स पर 250 कंडक्टरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ समेत कई राज्यों के 6364 युवाओं ने फॉर्म भरा और सीटीयू ने सभी से 450 रुपये व 50 रुपये बैंक फीस के रूप में लिए। इसके बाद सभी को प्रवेश पत्र जारी किए गए और पंजाब यूनिवर्सिटी की तरफ से शहर के विभिन्न सरकारी स्कूलों में परीक्षाएं ली गईं। 


12 जनवरी 2020 को सीटीयू की तरफ से परीक्षा के नतीजे जारी किए गए। 392 अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट भी बन गई। यह लिस्ट पिछले 19 महीने से सीटीयू की वेबसाइट पर थी, लेकिन अब जब युवाओं के सब्र का बांध टूटा और उन्होंने प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से नियुक्ति की मांग की तो सीटीयू ने पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को सीटीयू ने वेबसाइट से दो सूची को हटा दिया। इसमें एक 392 अभ्यर्थियों की मेरिट सूची है, जबकि दूसरी 6364 युवाओं की ओर से दिए गए परीक्षा केनतीजे हैं। विभाग ने भले वेबसाइट से इन्हें हटा दिया है, लेकिन अभ्यर्थियों ने इन्हें पहले ही सुरक्षित रख लिया है। अभ्यर्थियों के पास सीटीयू की वेबसाइट के स्क्रीनशॉट भी हैं, जिसमें मेरिट सूची और नतीजे दोनों दिखाई दे रहे हैं।
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सोशल मीडिया पर चलाया अभियान, पूछा- हमारी क्या गलती 

अभ्यर्थियों ने बताया कि जनवरी 2020 में मेरिट सूची के जारी होने के बाद फरवरी 2020 में कई चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच और मेडिकल भी हुआ, लेकिन इस बीच कोरोना के दस्तक दे दी और फिर पूरी प्रक्रिया रुक गई। अब जब सब कुछ सामान्य हो चुका है, तो भी उनकी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। वह अब कभी सीटीयू के अधिकारी तो कभी यूटी सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं। उनकी क्या गलती है, उन्होंने तो फीस भरी है, परीक्षा पास की है। इसे लेकर अब युवाओं ने सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया है और प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को टैग कर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नौकरी के इंतजार में अन्य परीक्षाओं के लिए भी तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।

परीक्षा में बैठने के लिए रखी गई थी पुरानी नौकरी छोड़ने की शर्त
392 अभ्यर्थियों की मेरिट सूची में शामिल एक अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा में बैठने से पहले सीटीयू ने एक शपथपत्र भी लिया था कि वह कहीं अन्य जगह नौकरी नहीं करते हैं। इस नियम की वजह से सैकड़ों युवाओं ने अपनी नौकरी छोड़ी और फिर इस परीक्षा में बैठे। अब वह सभी बेरोजगार हैं और जिनका चयन हुआ है, उन्हें भी नौकरी नहीं दी जा रही है। इनकी मांग है कि रुकी हुई प्रक्रिया को तत्काल शुरू किया जाए और सभी को नियुक्ति दी जाए।

यह पूरा मामला क्या है, मुझे देखना पड़ेगा। उसके बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। अगर आउटसोर्स पर भर्ती निकली थी तो क्यों पूरी नहीं हुई, यह भी देखा जाएगा।  -धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक

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