पीजीआई प्रशासन की ओर से अब तक विभिन्न कैडर के 806 पदों में से 468 पदों पर तैनात कर्मचारियों को निष्क्रिय घोषित कर दिया गया है। इनमें इलेक्ट्रीशियन, लिफ्ट ऑपरेटर, बायोमेडिकल डिवीजन के पद, इंजीनियरिंग के पद, हार्टीकल्चर, ड्राविंग, तकनीशियन, ब्वॉयलरमैन, सीवरमैन, मेसन, पेंटर, व्हाइटवॉशर, ड्राफ्टमैन शामिल हैं।
कैडर को कैसे निष्क्रिय किया जाता है, ऐसे समझें
सरकारी संस्थान के ऐसे पद जिनका मौजूदा समय में कोई औचित्य न हो, उसे डाइंग यानी निष्क्रिय घोषित कर उस कैडर का अन्य कैडर में विलय कर दिया जाता है। उदाहरण के रूप में पीजीआई में शुरुआती दौर में एक वैक्सीनेटर और एक कंप्यूटर का पद था। दोनों में एक-एक कर्मचारी तैनात थे। बाद में इसे डाइंग घोषित कर दिया गया। अब दोनों पदों की जगह दो अलग कैडर स्थापित हो चुके हैं, जिसमें सैकड़ों कर्मचारी नियुक्त किए जा रहे हैं।
किसी भी संस्थान में जिन पदों को गैरजरूरी मान लिया जाता है, उसे मानक के अनुसार डाइंग कैडर घोषित कर दिया जाता है। पीजीआई ने भी इसी मानक का पालन करते हुए ऐसा किया है। जिन पदों पर कर्मचारियों की जरूरत महसूस हो रही है, उन पर ठेके के जरिए तैनाती की जा रही है। - कुमार गौरव, उप निदेशक प्रशासन (डीडीए), पीजीआई
कोआर्डिनेशन कमेटी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्णय कैसे ले सकती है। यह हास्यास्पद है कि पीजीआई जैसे संस्थान में इलेक्ट्रीशियन और लिफ्ट ऑपरेटर जैसे कर्मचारियों की जरूरत न हो। ऐसा करके एक तरफ सरकारी पद समाप्त किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ठेका प्रथा पर रोक संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर ठेका कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। -अश्वनी कुमार मुंजाल, अध्यक्ष, पीजीआई कर्मचारी संघ गैर संकाय