चंडीगढ़ में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतरी के लिए जिस मेट्रो प्रोजेक्ट से सबसे ज्यादा आस थी वह अब डंप हो गया है। प्रशासन ने भी इसे साइड लाइन कर नए विकल्प पर काम शुरू कर दिया है।
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फ्रांस की एजेंस फ्रांस डी डेवलपमेंट (एएफडी) का कंसल्टेंट अगले सप्ताह से शहर में काम शुरू कर देगा। मेट्रो प्रोजेक्ट फेल होने के बाद अब प्रशासन एएफडी के भरोसे ही है। उससे चंडीगढ़ प्रशासन ने एमओयू साइन किया है। एएफडी की जिम्मेदारी है कि वह शहर का सर्वे कर उसके आधार पर बेहतर ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के लिए कौन सा विकल्प अपनाना बेहतर होगा। विकल्प तय होने के बाद एएफडी यूटी प्रशासन को तकनीकी और आर्थिक मदद भी देगा। अधिकारियों के अनुसार 25 जनवरी से पहले एफडीए शहर में अपना काम शुरू कर देगी।
नया विकल्प कितना कारगर और कब मिलेगा यह तो बाद में ही पता चलेगा। लेकिन पिछले नौ साल में मेट्रो की माथापच्ची में 10 करोड़ रुपये स्वाह कर दिए गए। मेट्रो को लेकर पिछले 9 सालों में 110 मीटिंग हुईं, जिसमें चंडीगढ़ ही नहीं पंजाब और हरियाणा के अधिकारी भी शामिल रहे। ट्रैफिक समस्याओं को देखते हुए वर्ष 2007 में मास्टर प्लान-2031 के तहत मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया था।
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इन शर्तों की वजह से तोड़ा दम
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- फोटो : File Photo
दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) ने मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेंट (एमओयूडी) की आब्जर्वेशन रिपोर्ट के आधार पर प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए 200 एकड़ जमीन मुहैया कराने की शर्त रखी थी। ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में प्रतिवर्ष 1025 करोड़ रुपये देने होंते ।
पंजाब और हरियाणा भी इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार थे इसलिए उन्हें भी इसकी जानकारी दी जा चुकी है। लेकिन यह दोनों ही शर्तें पूरी कर पाना असंभव लग रहा था । चंडीगढ़ प्रशासन के पास लगभग 600 एकड जमीन ही बची है। वह भी विभिन्न प्रोजेक्ट्स और संस्थानों को आवंटित है। रही बात बजट की तो जिस शहर को साल में प्लान हेड के तहत ही 700 करोड़ मिलते हों वह 1025 करोड़ अलग से कैसे जुटाएगा। सबसे पहले प्रशासन ने 2012 में मेट्रो के लिए डीपीआर तैयार की थी जो 10,900 करोड़ की थी। इसके बाद प्रोजेक्ट 13,909 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। देरी के साथ बजट में वृद्धि ही होती।
चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में बनने थे 30 स्टेशन
संशोधित डीपीआर के अनुसार मेट्रो पर 2016 से काम शुरू होना था, और 2021 तक खत्म करना था। मेट्रो के चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में कुल 30 स्टेशन बनने थे। इनमें 19 स्टेशन एलिवेटेड और 11 अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जाने थे। मेट्रो की गति 80 से 85 किमी. प्रतिघंटे होगी। तीनों शहरों में मेट्रो रूट को दो गलियारों में बांटा गया था। एक गलियारा 25.07 किलोमीटर और दूसरा 12.49 किलोमीटर का होता। मेट्रो ट्राईसिटी में 37 किलोमीटर के रूट पर दौड़नी थी।
चंडीगढ़ मेट्रो का सफर
- फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ मेट्रो का सफर
- 2007: में प्रोजेक्ट की प्लानिंग शुरू हुई।
- 2008: में राइट्स कंपनी को कंसल्टेंसी का काम दिया।
- 2010: में राइट्स कंपनी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
- 2012: दिल्ली मेट्रो ने रिपोर्ट बनाई।
- 2015: चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार ने एमओयू पर साइन किए।
- 2015: दिल्ली मेट्रो ने तैयार की संशोधित डीपीआर
- 2015: में संशोधित डीपीआर एमओयूडी के पास मंजूरी के लिए भेजी गई।
- 2015: एमओयूडी ने प्रोजेक्ट पर पंजाब और हरियाणा की लिखित में सहमति मांगी।
- 2015: पंजाब और हरियाणा की लिखित सहमति का लेटर एमओयूडी को भेजा गया।
- 2016: में एमओयूडी ने यूटी प्रशासन से सात सवाल पूछे।
- 2016: प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के तहत 200 एकड़ जमीन मांगी गई । जमीन नहीं दे पाने की स्थिति में 1 हजार करोड़ रुपये सालाना की व्यवस्था करनी थी।
- 2016: जमीन और बजट की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण पंजाब, हरियाणा और डीएमआरसी के साथ मीटिंग। पंजाब और हरियाणा को इसकी जानकारी दी गई।
मेट्रो की आस से जन्मे यह सब सपने ही रह गए
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- फोटो : File Photo
मेट्रो की आस से जन्मे यह सब सपने ही रह गए
- 80 फीसदी समय बचता
- 60 फीसदी बचत होती पेट्रोल डीजल की
- 90 फीसदी कम होता कार्बन उत्सर्जन
- 95 फीसदी कमी आती दुर्घटना दर में
- 80 फीसदी कम खर्च होता सड़कों के रखरखाव में
- 2043 तक 52972.61 करोड़ रुपये बचते
- अब बसों के भरोसे ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट होगा बेहतर
- 40 बसों की चेसी खरीदी, 120 का टेंडर अगले सप्ताह होगा जारी
मेट्रो डंप होने के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बसों का ही सहारा होगा। इसे बेहतर करने की प्रक्रिया के तहत प्रशासन ने 40 सामान्य बसों की चेसीज खरीद ली है। इनकी बॉडी तैयार करने का टेंडर सप्ताह के भीतर जारी होगा। 120 एचवीएसी बसों का टेंडर भी सात दिनों के भीतर जारी हो जाएगा। साथ ही 40 सुपर लग्जरी बसों की फाइल को फायनेंस डिपार्टमेंट की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। 472 बसें अभी सीटीयू के पास हैं यह 200 नई बसें मिलने के बाद संख्या 672 पहुंच जाएगी। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट का दावा है कि इतनी बसें होने के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर स्थिति में होगा।
बसें बढ़ने से राहत, लेकिन ट्रैफिक बनेगा आफत
बसों की संख्या बढ़ने से बस फ्रिक्वेंसी तो बढ़ेगी लेकिन सड़कों पर पहले ही वाहनों की संख्या अधिक है। बसें बढ़ने से स्थिति और खराब होगी। इसी बात को देखते हुए भूमिगत और एलिवेटेड मेट्रो का विकल्प बेहतर मानकर काम शुरू किया गया था। अभी भी सुबह और शाम के वक्त मुख्य राउंड अबाउट और सड़कें वाहनों से घिरी रहती हैं। चंडीगढ़ में ढाई महीने के अंदर 10 हजार निजी वाहनों का पंजीकरण हो रहा है। कॉमर्शियल वाहनों की संख्या इससे अलग है। कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या वर्तमान में करीब 15 लाख है। दूसरे प्रदेशों से आने वाले लाखों वाहन इससे अलग हैं। वाहनों की इस तेजी से बढ़ती गति ने चंडीगढ़ की चौड़ी और नियोजित सड़कों को भी संकरी कर दिया है। कुछ सालों बाद स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है।
फ्रांस की एजेंसी सप्ताह भर में काम शुरू करेगी। बसें खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। नई बसें आने के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट काफी बेहतर होगा। सामान्य से सुपर लग्जरी तक बसें खरीदी जा रही हैं। मेट्रो के लिए अभी कई दिक्कतें हैं जिन्हें दूर करना बाकी है। इनकेक्लीयर होने के बाद ही आगे कुछ होगा।
अमित तलवार, डायरेक्टर, ट्रांसपोर्ट।