वह मुख्यमंत्री के सलाहकार के पद तक पर अपनी सेवाओं दे चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके उनको इस बार अपनी जमानत गंवानी पड़ी है। इसी सीट पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार सिर्फ 0.46 फीसदी वोट प्राप्त कर पाए। खडूर साहिब सीट पर विरसा सिंह वल्टोहा व भाजपा प्रत्याशी मनजीत सिंह मन्ना मियाविंड के हाथ सिर्फ 8.25 फीसदी ही वोट ही लगे। मियाविंड तीन बार के विधायक हैं और शिअद से उनका नाता रहा है। वर्ष 2002 से लेकर 2012 तक खडूर साहिब से वह विधायक रह चुके हैं। इसी तरह वल्टोहा की पहचान एक टकसाली नेता के रूप में है।
वह पूर्व विधायक होने के साथ ही शिअद के मुख्य प्रवक्ता भी रह चुके हैं। इस सीट पर बसपा के सतनाम सिंह भी अपनी जमानत नहीं बचा पाए हैं। इसी तरह कांग्रेस छोड़कर शिअद की टिकट पर जालंधर से चुनाव में उतरे मोहिंदर सिंह केपी भी 67,911 (6.87) फीसदी ही वोट प्राप्त कर सकें हैं। वह 2009 में जालंधर से सांसद रह चुके हैं। तीन बार के विधायक केपी राज्य में दो बार मंत्री भी रह चुके हैं। यही कारण है कि शिअद ने उनको जालंधर से टिकट थमाई थी।
अगर फरीदकोट सीट की बात की जाए तो यहां पर भाजपा प्रत्याशी हंस राज हंस को 1,23,533 (12.18%) फीसदी वोट पड़े। इस चुनाव में हंस राज हंस को किसानों का सबसे अधिक विरोध का सामना करना पड़ा था। वह दिल्ली की उत्तर पश्चिम सीट से पिछली बार सांसद रह चुके हैं। वह शिअद व कांग्रेस से होते हुए भाजपा में शामिल हुए थे।
इसी तरह यहां कांग्रेस प्रत्याशी अमरजीत कौर को भी सिर्फ 15.81 फीसदी वोट से ही संतुष्टि करनी पड़ी है। उनको चुनाव में कुल 1,60,357 वोट पड़े। इसी तरह शिअद के राजविंदर सिंह धर्मकोट को भी 13.63 फीसदी वोट पड़े हैं। वह लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं और पूर्व मंत्री गुरदेव सिंह बादल के दोहते हैं। इसी तरह बठिंडा में भाजपा की परमपाल कौर सिद्धू को 9.62 और शिअद अमृतसर के लक्खा सिधाना को 7.36 फीसदी वोट पड़े।
इसके अलावा भाजपा के अरविंद खन्ना को भी संगरूर से अपनी जमानत गंवानी पड़ी है। उनको 1,28,253 (12.7%) वोट पड़े हैं। वह विधायक रह चुके हैं। शिअद के इकबाल सिंह झूंदा भी इस लिस्ट में शामिल हैं और उनको 6.19 फीसदी वोट पड़े हैं। अगर पटियाला सीट पर शिअद प्रत्याशी एनके शर्मा की बात की जाए तो उनको 1,53,978 (13.37 %) वोट पड़े हैं।
फतेहगढ़ साहिब की सीट पर भाजपा के गेजा राम को 1,27,521 (13.09 %) और शिअद के बिक्रमजीत सिंह खालसा को 1,26,730 (13.01%) वोट मिले हैं। इसी तरह होशियारपुर में शिअद के प्रत्याशी सोहन सिंह ठंडल 91,789 मत हासिल किए और उनको 9.68 फीसदी वोट पड़े हैं। ठंडल चार के विधायक हैं और अकाली-भाजपा सरकार में मंत्री व मुख्य संसदीय सचिव भी रह चुके हैं। इस सीट पर कांग्रेस छोड़कर आप से चुनाव लड़कर डाॅ. राजकुमार चब्बेवाल सांसद बने हैं।
उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी यामिनी गोमर को मात दी। इसी तरह आनंदपुर साहिब सीट पर शिअद के प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा को 1,17,936 मत पड़े। उन्होंने 10.95 फीसदी वोट हासिल किए, लेकिन वह अपनी जमानत नहीं बचा पाए। चंदूमाजरा की राजनीति में अच्छी पकड़ मानी जाती है। इसका अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 1998 के चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह व 2014 में अंबिका सोनी को मात दी थी। यहां बसपा पंजाब प्रधान बसवीर सिंह गढ़ी भी 8.37 फीसदी वोट ही हासिल कर पाए और अपनी जमानत गंवा बैठे। लुधियाना सीट पर शिअद के रणजीत सिंह ढिल्लों को 8.52 फीसदी वोट मिले।