अंबाला में 1857 की क्रांति के नायकों का बखान करने के लिए बन रहा स्मारक यहां आने वाले पयर्टकों को एक दिन अंबाला में गुजारने के लिए मजबूर करेगा। दिल्ली से शिमला और मनाली जाने वाले पर्यटकों को रोकने में यह स्मारक अहम होगा। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में पयर्टन को तो बढ़वा मिलेगा ही साथ ही राजस्व भी बढ़ेगा। अभी तक इस रास्ते से जाने वाले टूरिस्ट कुछ देर के लिए पिंजौर गार्डन रुकते हैं। जब अंबाला में माकूल इंतजाम होंगे तो एक टूरिस्ट यहां रुके बिना नहीं जा पाएगा।
गृह मंत्री अनिल विज अंबाला छावनी से विधायक हैं। उनका कहना है कि अंबाला आओगे तो हम से मिल के जाओगे। इस कहावत का मतलब है कि अंबाला आकर स्मारक देखने वालों की संख्या मात्र से ही उन्हें यह सकून मिल जाएगा कि वे उन लोगों से मिल लिए। गृह मंत्री ने कहा कि आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक आजादी की दास्तान बयां करेगा। यह स्मारक संभवत: देश का सबसे बड़ा शहीद स्मारक होगा। इस स्मारक में संग्रहालय भी बनाया जा रहा है, जिसमें लगाई जाने वाली विभिन्न प्रदर्शित वस्तुओं के रख-रखाव व मूल्यांकन के लिए पंडित लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफोरर्मिंग एंड विजुअल आर्टस को कार्य सौंपा जाएगा, क्योंकि इस क्षेत्र में इस संस्थान की विशेषज्ञता है।
इस संबंध में विश्वविद्यालय को उनके द्वारा एक पत्र भी लिखा गया है ताकि वे स्मारक के संग्रहालय में स्थापित किए जाने वाली प्रदर्शित वस्तुओं की जांच व मूल्यांकन कर सकें। इन प्रदर्शित वस्तुओं में मूर्तियां व भित्ती चित्र, धातु स्क्रॉल, फाइबर स्क्रॉल, ऐक्रेलिक शीट-आधारित डिजाइन, सीमेंट आधारित डिजाइन शामिल हैं।