चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के सीनेट चुनाव तीन अगस्त से शुरू हो रहे हैं। इससे पहले सभी को मनोनीत सदस्यों की सूची का इंतजार है। इस सूची के 36 लोगों के नाम चांसलर तय करते हैं। जैसे ही यह सूची सार्वजनिक होगी तो सीनेट चुनाव का माहौल बदलेगा। माना जाता है कि मनोनीत सदस्य जिस दल से अधिक होंगे, उसी का पलड़ा आगे भी भारी माना जाता है। मनोनीत सदस्यों में इस बार भी कई नेताओं के नाम शामिल हो सकते हैं। जैसे ही मनोनीत सदस्यों के नाम सामने आएंगे, उसके बाद दूसरे सदस्य उसी हिसाब से अपनी तैयारी करेंगे।
सीनेट की बैठकों में हर हाल में लेना होगा भाग
सीनेट में सदस्यों की संख्या 91 है। इनमें से 36 सदस्यों का मनोनयन चांसलर कार्यालय से होता है। इस सूची में पंजाब विश्वविद्यालय के अलावा अन्य शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, राजनीतिक दलों के नेता, उद्योगपति आदि शामिल होते हैं। 2016 में भी सदस्यों का मेल कुछ इसी तरह से रहा। कुछ सदस्यों ने सीनेट की बैठकों में हिस्सा लिया तो कुछ ने नहीं। दो साल पहले पांच सदस्यों को हटाया भी गया था, जो बैठकों में लंबे समय से भाग नहीं ले रहे थे। सूत्रों का कहना है कि इस बार भी मनोनीत सदस्य ऐसे ही चयनित होंगे जो शिक्षा जगत से जुड़े होंगे और जो पीयू को आगे ले जाने का सपना देखते हों।
राजनीतिक दलों के सदस्य इस तरह कर रहे हैं तैयारी
पिछली सीनेट में कांग्रेस का दबदबा रहा था। उनके पास सर्वाधिक सदस्य थे। इस बार भाजपाई कोशिश में जुटे हैं कि वे दबदबा कायम करें। इसी को देखते हुए वह मनोनीत सदस्यों की सूची में सर्वाधिक अपने सदस्य लेकर आएंगे। इसके अलावा भाजपा के नेता इस जुगत में हैं कि चुनाव जिन सीटों के लिए हो, उनमें भी लगभग 60 फीसदी पर उनका कब्जा हो। हालांकि यह आसान नहीं है, क्योंकि सीनेट में कांग्रेस से जुड़े कुछ ऐसे धुरंधर हैं जो एक बार बोलते हैं तो माहौल बदल देते हैं। ऐसे में भाजपा के लिए राह आसान नहीं है। वहीं कांग्रेस के सदस्य भी रात-दिन तैयारी में हैं। वे कोशिश कर रहे हैं कि चुनाव वाली सभी सीटों पर उनका कब्जा हो, क्योंकि मनोनीत होने वाले सदस्यों की सूची में उनके लोगों के नाम होने की संभावना नजर नहीं आ रही।