हरियाणा में शैक्षणिक सत्र 2022-23 से पहली कक्षा में दाखिला लेना कठिन हो जाएगा। विद्या प्रवेश मापदंड में पास होने पर ही बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला मिलेगा। सरकार ने इसके लिए तीन महीने का मॉड्यूल तैयार किया है। जिसे सरकारी स्कूल में प्रवेश पाने के इच्छुक हर बच्चे को पढ़ना पड़ेगा। प्रवेश से पहले मूल्यांकन होगा और इसे पास करने वाले बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के फाउंडेशन लिटरेसी न्यूमरेसी मिशन के तहत स्कूल शिक्षा विभाग इसे लागू करने जा रहा है।
पूरे देश में ऐसा करने वाला हरियाणा पहला राज्य होगा। विद्या प्रवेश मापदंड लागू होने के बाद शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा। शाला पूर्व शिक्षा ग्रहण किए बिना बच्चे सरकारी स्कूलों में भी दाखिला नहीं ले पाएंगे। इसे सही तरीके से अमलीजामा पहनाया जा सके, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग 37 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2021-22 में 2 लाख 11 लाख बच्चों ने दाखिला लिया है। अगले वर्ष इनकी संख्या में इजाफा होने का अनुमान है।
निजी स्कूलों को टक्कर देने की तैयारी
इसका उद्देश्य निजी स्कूलों को टक्कर देना है। चूंकि, उनमें पहली कक्षा तक बच्चे नर्सरी, एलकेजी व यूकेजी की पढ़ाई के बाद पहुंचते हैं। सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों का लर्निंग लेवल निजी स्कूलों के बच्चों के समान नहीं होता है। जिससे पहली कक्षा से ही उनकी पढ़ाई की नींव मजबूत नहीं हो पाती और वे पिछड़ जाते हैं। सरकार चाहती है कि पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाला बच्चा सीखने की न्यूनतम क्षमता के साथ आगे बढ़े।
शुरू से स्पष्ट होंगी पढ़ाई की सामान्य अवधारणाएं : अंशज सिंह
निदेशक मौलिक शिक्षा अंशज सिंह ने बताया कि विद्या प्रवेश मापदंड पढ़ने से बच्चों को शुरुआत से ही पढ़ाई की सामान्य अवधारणाएं स्पष्ट होंगी। 37 हजार शिक्षकों को जनवरी से मार्च महीने तक भौतिक तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। विशेषज्ञ उन्हें नए मापदंडों के बारे में विस्तार से बताएंगे। दाखिला से पूर्व किए जाने वाले मूल्यांकन के बारे में जानकारी दी जाएगी। नई प्रणाली के जरिये बच्चों को पूर्व की तुलना अधिक सक्षम बनाना है।