पांच तरफा मुकाबले में विपक्षी दलों के बीच बंटने वाले वोट कांग्रेस को राहत देते दिखाई दे रहे हैं। आमतौर पर मतदान के प्रति वोटरों का कम उत्साह सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में जाता रहा है। यह वोट बैंक अपने पारंपरिक दल की ओर लौटता है तो इससे आप को नुकसान और संबंधित दलों को फायदा होगा।
पिछले साल के मुकाबले मालवा में कम वोटिंग
आम आदमी पार्टी (आप), जिसने 2017 में मालवा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 20 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल का रुतबा हासिल कर लिया था, के लिए इस बार का वोटिंग ट्रेंड चिंता का विषय है। मालवा के 15 जिलों की 69 सीटों के लिए 2017 में 79.86 फीसदी मतदान हुआ था, जबकि इस बार यह प्रतिशत 69.03 फीसदी है। वैसे मालवा के आठ जिलों में 75 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया है। वहीं तलवंडी साबो हलके में 83.67 फीसदी मतदान हुआ है फिर भी मानसा, बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, मुक्तसर और संगरूर जिले में मतदान 2017 के मुकाबले कम रहा है।
वोटिंग प्रतिशत के साथ बदलती रहीं सरकारें
पंजाब के विधानसभा चुनाव के पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो हर बार मतदान प्रतिशत से सत्ता परिवर्तन होता रहा है। 1997 में मतदान 68.7 फीसदी था और शिअद-भाजपा गठबंधन ने सरकार बनाई थी लेकिन 2002 में मतदान का प्रतिशत घटकर 62.14 फीसदी रह गया और कांग्रेस सत्ता में आ गई।
सूबे में जब-जब वोट प्रतिशत बढ़ा तो सरकार दोबारा आई है। पंजाब जब अलग राज्य बना तो 1967 में शिअद सत्ता में आया। उस समय 71.18 फीसदी मतदान हुआ था। 1969 जब अगला विधानसभा चुनाव हुआ तो मतान का प्रतिशत बढ़कर 72.27 फीसदी हो गय और शिअद दोबारा सत्ता में आ गया। इसी तरह 2007 में 76 फीसदी मतदान के साथ वोटरों ने शिअद-भाजपा गठबंधन को सत्ता पर काबिज करा दिया। अगले (2012) विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 78.3 फीसदी मतदान हुआ और शिअद दोबारा सत्ता में आ गया। 2017 के चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर से घटा और 77.2 फीसदी रह गया और कांग्रेस ने सत्ता संभाल ली। अब 2022 में मतदान प्रतिशत फिर से कम हुआ है।
- मालवा में 2017 में 79.86 फीसदी मतदान
- 2022 में 69.03 फीसदी
- माझा में 2017 में 73.04 फीसदी मतदान
- 2022 में 63.11 फीसदी
- दोआबा में 2017 में 76.99 फीसदी मतदान
- 2022 में 63.64 फीसदी