तीन फरवरी को भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का जन्मदिन है। उनका जन्म 1963 में मध्य प्रदेश में हुआ था। वह एक तमिल परिवार में पैदा हुए थे और उनके पिता भारत सरकार में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी थे। रघुराम राजन की पढ़ाई दिल्ली के आरके पुरम में स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से हुई थी।
पूर्व आरबीआई गर्वनर का पूरा नाम रघुराम गोविंदा राजन है। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई आईआईटी दिल्ली से की है। आईआईटी दिल्ली से इन्होंने साल 1985 में इलेक्ट्रिक्ल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। वहीं वर्ष 1987 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में अपना पोस्ट ग्रेजुएट किया। रघुराम राजन ने विश्व की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी एमआईटी से एसेज ऑन बैकिंग विषय पर पीएचडी की।
रघुराम राजन अक्तूबर, 2003 से दिसंबर, 2006 तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में कार्यरत रहें। वर्ष 2008 में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रघुराम राजन को अपना अवैतनिक आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया। इसी साल रघुराम राजन को योजना आयोग की एक आर्थिक सुधारों की उच्च स्तरीय कमेटी का प्रमुख बनाया गया। इस कमेटी ने रघुराम राजन की देखरेख में आर्थिक सुधारों से जुड़ी रिपोर्ट को पूरा किया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में रहे कौशिक बसु बतौर मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। रघुराम राजन को 10 अगस्त, 2012 को कौशिक बसु की जगह पर भारत सरकार का मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया। वर्ष 2012-13 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण को तैयार करने का काम भी रघुराम राजन ने किया। वर्ष 2013 में 27 फरवरी को रघुराम राजन के नेतृत्व में तैयार किया गया आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया।
छह अगस्त, 2013 को आरबीआई गवर्नर के रूप में रघुराम राजन का नाम की घोषणा की गई। चार सितंबर, 2013 को देश के 23वें गवर्नर के रूप में रघुराम राजन नए गवर्नर बने। रघुराम राजन देश के सबसे युवा बनने वाले गवर्नरों में से हैं। रघुराम राजन ने 22वें गवर्नर डी. सुब्बाराव की जगह ली।
इन दिनों राजन यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं। रघुराम राजन ने जब रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद संभाला तो एक डॉलर की तुलना में रुपया 68 के स्तर तक पहुंच गया था। साथ ही महंगाई को रोकने के लिए बैंक दरों को संतुलित करने की जिम्मेदारी भी रघुराम राजन के ऊपर थी। छह माह के अपने कार्यकाल के दौरान रघुराम राजन ने कई बार बैंक दरों में बदलाव किया। इससे महंगाई रोकने में काफी हद तक मदद मिली।