Bihar Cabinet Decision : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लिया था। 2 दिन के अंदर उसे फैसले को रद्द करने की नौबत है। फैसला बिहार में मुखिया की शक्तियों को कम करने का था। फैसले के तत्काल बाद से विरोध शुरू हो गया था।
बिहार सरकार ने पंचायती राज के मुखिया की आर्थिक शक्ति को कम करने का जो फैसला शुक्रवार की मंत्रिमंडल की बैठक में लिया था, उसे बदलने की तैयारी हो गई है। पंचायत के अधिकार क्षेत्र में 15 लाख का काम कराने के लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया की अनिवार्यता का फैसला लिया था। यह निर्णय पंचायती राज व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए था। लेकिन, इस हमले के खिलाफ मुखिया संघ ने अभियान छेड़ दिया। अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार के लिए इस फैसले पर कायम रहना मुश्किल हो गया। आखिरकार शुक्रवार के फैसले को रविवार की शाम सरकार ने फैसला बदलने पर पुनर्विचार की जानकारी दी। रविवार की शाम इसकी घोषणा पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद ने की।
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मुख्यमंत्री करेंगे पुनर्विचार
पंचायती राज मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के लिए जनता द्वारा चुनी गई सरकार ही काम करती है। एनडीए सरकार विकास के लिए काम कर रही है। गलत जो करेगा उसका फैसला जनता करेगी। आज त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं द्वारा योजनाओं के लिए टेंडर (15 लाख) प्रकिया कराए जाने के फैसले का पंचायतों के प्रतिनिधि विरोध कर रहे थे। पंचायती राज विभाग ने मुखिया संघ के असंतोष को बदलने के लिए इस फैसले को पुनर्विचार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास भेज दिया है। अब सरकार का जो निर्णय होगा, वह मान्य होगा।