पौराणिक मान्यता है कि शनिदेव को श्राप मिला हुआ है कि वह जिस भी किसी को देखेंगे उसका अनिष्ट हो जाएगा। यही कारण है कि शनिदेव की दृष्टि से बचने के लिए घर पर उनकी मूर्ति नहीं लगाई जाती है। मंदिर में पूजन करते समय भी शनिदेव की दृष्टि की ओर नहीं देखा जाता है। कभी शनिदेव के एक दम सामने खड़े होकर या फिर उनकी आंखों में आंखे डालकर दर्शन एवं पूजन नहीं करना चाहिए। घर में शनिदेव का स्मरण किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कि क्यों शनिदेव की दृष्टि अनिष्टकारी मानी जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार शनिदेव भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन थे, उसी समय वहां पर उनकी पत्नी संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर आई लेकिन शनिदेव इतने लीन थे कि लाख प्रयास करने के बाद भी उनका ध्यान नहीं टूटा और उन्होंने अपनी पत्नी की ओर नहीं देखा। इससे शनिदेव की पत्नी अत्यंत क्रोधित हो गई और उन्होंने श्राप दे दिया कि अगर वे अपनी पत्नी को नहीं देख सकते तो उनकी दृष्टि विच्छेदकारक हो जाएगी। इसका मतलब कि वे जिसकी ओर भी देखेंगे उसका अनिष्ट हो जाएगा। इस संबंध में पौराणिक कथा भी मिलती है, जिसके अनुसार गणेश जी का सिर भी शनिदेव की वक्र दृष्टि के कारण धड़ से अलग हुआ था।