ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह
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ज्योतिष में सूर्य को राजा की पदवी प्रदान की गई है, ज्योतिष के अनुसार सूर्य आत्मा एवं पिता का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य द्वारा ही सभी ग्रहों को प्रकाश प्राप्त होता है और ग्रहों की इनसे दूरी या नज़दीकी उन्हें अस्त भी कर देती है। सूर्य सृष्टि को चलाने वाले प्रत्यक्ष देवता का रुप हैं। कुंडली में सूर्य को पूर्वजों का प्रतिनिधि भी माना जाता है। सूर्य पर किसी भी कुंडली में एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने पर उस कुंडली में पितृ दोष का निर्माण हो जाता है।
व्यक्ति की आजीविका में सूर्य सरकारी पद का प्रतिनिधित्व करता है। व्यक्ति को सिद्धान्तवादी बनाता है, इसके अतिरिक्त सूर्य कार्यक्षेत्र में कठोर अनुशासन अधिकारी, उच्च पद पर आसीन अधिकारी, प्रशासक, समय के साथ उन्नति करने वाला, निर्माता, कार्यों का निरिक्षण करने वाला बनाता है। जन्मकुंडली में सूर्य कमजोर होने पर जातक को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कुंडली में सूर्य सही स्थिति में नहीं है तो इससे उस व्यक्ति को यश, कीर्ति और मान-सम्मान मिलने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सूर्य ग्रह के ख़राब स्थिति में होने का एक लक्षण ये भी है कि पिता से संबंध अच्छे नही रहते हैं और कई बार तो ऐसे व्यक्ति का उनके पिता से साथ भी छूट सकता है।
सूर्य के कमजोर होने से रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होती है जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। सूर्य के कमज़ोर होने से ह्रदय रोग, पेट की बीमारी और आँख के रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आपके चेहरे पर तेज का अभाव है और आप हमेशा खुद को थका हुआ महसूस करते हैं तो ये भी सूर्य ग्रह के कमज़ोर होने की तरफ इशारा करता है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह
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सूर्य मजबूत करने के उपाय
सूर्य ग्रह को मजबूत करना हो उसके लिए सबसे पहले अपने घर की पूर्व दिशा को स्वच्छ करना चाहिए। हमेशा अपने पिता और किसी भी पितातुल्य व्यक्तिओं का सम्मान करें। सुबह सूर्योदय से पहले उठने की आदत डालें। प्रतिदिन सूर्योदय के समय उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। आदित्यह्दयस्त्रोत का पाठ करने से सूर्य भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ सूर्य भगवान को अर्घ्य देते समय जल में कुमकुम, लाल फूल, इत्र तीनों या इनमें से कोई एक सामग्री डालकर अर्घ्य देने से विशेष शुभ फल की प्राप्ति होती है।