रयान इंटरनेशनल स्कूल में बच्चे का बेरहमी से कत्ल, देश की राजधानी में सात साल की बच्ची से रेप, फिर डेढ़ साल की बच्ची से दुष्कर्म की खबर, स्कूल बस कंडक्टर की अश्लील हरकत, ब्लू व्हेल गेम से गुमराह हो मौत को गले लगाते बच्चे...ये सारी खबरें आप अमूमन रोज़ अखबार में पढ़ते होंगे। कभी आपने सोचा है कि आखिर हमारे बच्चे कहां सुरक्षित हैं? घर में?स्कूल में?खेल के मैदान में? आखिर क्यूं ऐसी घटनाएं हमें रोज़ देखने को मिलती हैं, कौन है इसके लिए जिम्मेदार? समाज आपसे और हमसे ही बनता है, क्या हम अपने बच्चों को सुरक्षा जैसी एक बेसिक चीज नहीं दे सकते?
स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था, कंडक्टर की प्रामाणिकता, बच्चों को सजग बनाना कि वे ना किसी हिंसा के शिकार बनें और ना ही हिंसा करें। ऐसे कई प्रयास हैं जो अंतर पैदा कर सकते हैं। आइए साथ मिलकर शपथ लें कि आप इस मुहिम में अमर उजाला के साथ हैं। आइए सुरक्षित बचपन के लिए इस यज्ञ में अपनी आहुति डालें।