जनरल सुलेमानी लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर अभियानों की अगुआई करते रहे, मगर कुछ साल पहले वो खुलकर सामने आए और इसके बाद वो ईरान में इतने लोकप्रिय हो गए कि उनके ऊपर लेख लिखे गए, डॉक्यूमेंट्रियां बनीं और यहां तक कि पॉप गीत भी बनने लगे।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के एक पूर्व अधिकारी जॉन मैग्वायर ने छह साल पहले अमेरिकी पत्रिका न्यूयॉर्कर से कहा - जनरल सुलेमानी मध्य-पूर्व में अभियान चलाने वाले सबसे ताकतवर शख्स हैं।
कमांडर बनने से पहले का जीवन
ईरान के दक्षिण-पश्चिम प्रांत किरमान के एक गरीब परिवार से आने वाले सुलेमानी ने 13 साल की आयु से अपने परिवार के भरण पोषण में लग गए। उनकी पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो पाई थी।
अपने खाली समय में वे वेटलिफ्टिंग करते और खामेनेई की बातें सुनते थे। फॉरेन पॉलिसी पत्रिका के मुताबिक सुलेमानी 1979 में ईरान की सेना में शामिल हुए और महज छह हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद पश्चिम अजरबैजान के एक संघर्ष में शामिल हुए थे।
ईरान-इराक युद्ध के दौरान इराक की सीमाओं पर अपने नेतृत्व की वजह से वे राष्ट्रीय हीरो के तौर पर उभरे थे। बताया जाता है कि वो देखते-देखते ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली खुमैनी के बेहद करीब आ गए।
सुलेमानी ने इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट के मुकाबले कुर्द लड़ाकों और शिया मिलिशिया को एकजुट करने का काम किया। हिज्बुल्लाह और हमास के साथ-साथ सीरिया की बशर अल-असद सरकार को भी सुलेमानी का समर्थन प्राप्त था।
अमेरिका मानता था दुश्मन
दूसरी तरफ सुलेमानी को अमेरिका अपने सबसे बड़े दुश्मनों में से एक मानता था। अमेरिका ने कुद्स फोर्स को 25 अक्तूबर 2007 को ही आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था और इस संगठन के साथ किसी भी अमेरिकी के लेनदेन किए जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।
सद्दाम हुसैन के साम्राज्य के पतन के बाद 2005 में इराक की नई सरकार के गठन के बाद से प्रधानमंत्रियों इब्राहिम अल-जाफरी और नूरी अल-मलिकी के कार्यकाल के दौरान वहां की राजनीति में सुलेमानी का प्रभाव बढ़ता गया।
उसी दौरान वहां की शिया समर्थित बद्र गुट को सरकार का हिस्सा बना दिया गया। बद्र संगठन को इराक में ईरान की सबसे पुरानी प्रॉक्सी फोर्स कहा जाता है।
2011 में जब सीरिया में गृहयुद्ध छिड़ा तो सुलेमानी ने इराक के अपने इसी प्रॉक्सी फोर्स को असद सरकार की मदद करने को कहा था जबकि अमेरिका बशर अल-असद की सरकार को वहां से उखाड़ फेंकना चाहता था। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध और सऊदी अरब, यूएई और इसराइल की तरफ से दबाव किसी से छुपा नहीं है।
और इतने सारे अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अपने देश का प्रभाव बढ़ाने या यूं कहें कि बरकरार रखने में जनरल कासिम सुलेमानी की भूमिका बेहद अहम थी और यही वजह थी कि वो अमेरिका, सऊदी अरबऔर इसराइल की तिकड़ी की नजरों में चढ़ गए थे। अमेरिका ने तो उन्हें आतंकवादी भी घोषित कर रखा था।
23 अक्तूबर 2018 को सऊदी अरब और बहरीन ने ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकवादी और इसकी कुद्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी को आतंकवादी घोषित किया था। और इसके बाद से ही जनरल सुलेमानी अमेरिका के निशाने पर थे।
3 जनवरी को जब बगदाद एयरपोर्ट पर उनके दो कारों के काफिले पर ड्रोन से निशाना लगाया गया, उस वक्त वो जिन लोगों के साथ सफर कर रहे थे, उनमें कताइब हिज्बुल्लाह के नेता अबु महदी अल-मुहांदिस भी थे।
2009 से ही अमेरिका ने कताइब हिज़्बुल्लाह को आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। उसने इसके कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस को वैश्विक आतंकवादी भी करार दिया था। जनरल सुलेमानी के साथ इस हमले में मुहांदिस की भी मौत हो गई।