अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, जनरल सुलेमानी पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों के प्रमुख रणनीतिकार थे। सुलेमानी पर इस्राइल में भी रॉकेट हमलों को अंजाम देने का आरोप था। रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिका को सुलेमानी की शिद्दत से तलाश थी। इसीलिए ट्रंप ने सीधे-सीधे सुलेमानी को मारने के आदेश दिए। सुलेमानी को निशाना बनाने का अमेरिका के लिए बड़ा कारण यह भी था कि वह सक्रिय रूप से इराक में अमेरिकी सेना और राजनयिकों पर हमले की योजना बना रहा था।
माना जा रहा है कि इन्हीं योजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए वह सीरिया और लेबनान में भी अपने सदस्यों को सक्रिय कर चुका था। इसके बाद वह इराक में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के बाद अमेरिका की सख्ती से निपटने के लिए अपने लड़ाकों को योजनाबद्ध ढंग से हमले के निर्देश देने बगदाद आया था। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने यह भी माना है कि जनरल सुलेमानी और उसकी कुर्द फोर्स सैकड़ों अमेरिकियों की मौत के लिए जिम्मेदार रही है।
करीब 21 साल पहले कुद्स सेना का प्रमुख बनने के बाद कई बार जनरल सुलेमानी की मौत की खबरें गलत साबित हुईं। खामनेई उसे ‘क्रांति का जिंदा शहीद’ कहते थे। कई बार 2006 में उत्तर-पश्चिम ईरान में विमान दुर्घटना में मौत की अफवाह उड़ी। 2012 में सीरिया के दमिश्क में बम धमाके में मरने की खबर भी झूठी निकली। नवंबर, 2015 में अलप्पो में आईएस के खिलाफ लड़ाई में भी मरने की खबर गलत निकली। इस बार भी शुरुआत में उनकी मौत की खबर को झूठा ही माना गया था।
हमले में चीथड़े उड़े, अंगूठी से की गई पहचान
इराक स्थित पॉपुलर मॉबलाइजेशन फोर्स के दो अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी सेना के ड्रोन हमले में जनरल सुलेमानी के शरीर के चीथड़े उड़ गए, जबकि मुहांदिस का शव तक नहीं मिला। सुलेमानी के शव की पहचान उनके हाथ में पहनी अंगूठी से हुई।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने जनरल सुलेमानी की मौत के बाद ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल गनी को रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स का नया कमांडर नियुक्त किया है। गनी अभी तक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के डिप्टी कमांडर थे। इससे गनी देश की सेनाओं के प्रमुख के रूप में नियुक्त हो पाएंगे।
क्या है कुद्स सेना
- विदेश में ईरान के खुफिया ऑपरेशनों को अंजाम देने वाली एलीट सेना ह्रै
- 15 हजार एजेंट मौजूद माने जाते हैं कुद्स सेना के भारत समेत 20 देशों में
इसलिए नाराज था अमेरिका
- 2003 से 2011 के बीच इराक में 603 अमेरिकी सैनिकों की मौत का जिम्मेदार मानता है
- 17 फीसदी हिस्सा है यह इराक में मारे गए अमेरिकी सेना की कुल संख्या का
- इराकी शिया विद्रोहियों को युद्ध तकनीक सिखाने व बम बनाने की तकनीक देने का आरोप
- कुछ दिन पहले बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के पीछे भी मानता है हाथ
इराकी मिलिशिया कमांडर हादी अल-अमीरी ने सभी ईरानी गुटों से एकजुट होने की अपील की है और विदेशी सैनिकों को देश छोड़ने के लिए कहा है। देश के सरकारी टीवी ने बताया कि अमीरी ईरान के बद्र संगठन का नेतृत्व करता है और इसके 1980 से यह सक्रिय है।
ट्रंप ने जश्न में पोस्ट किया अमेरिकी ध्वज
ईरान के बाहुबली जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका कुछ अलग ही अंदाज में जश्न मनाया। ट्रंप ने अपने ट्विटर हैंडलर से अमेरिकी ध्वज को ट्वीट किया। बिना टेक्स्ट के किए गए इस ट्वीट को माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इसके जरिए एक सख्त संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
इराक में सड़कों पर मना जश्न : पोम्पियो
अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल पोम्पियो ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि ईरान समर्थित कुर्द बल के प्रमुख मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत पर इराक की गलियों में लोग जश्न मना रहे हैं। 22 सेकंड के वीडियो में लोग कई मीटर लंबे इराक के राष्ट्रीय ध्वज को लेकर सड़क पर दौड़ रहे हैं। पोम्पियो ने कहा, ‘आजादी के लिए सड़क पर नाचते हुए इराकी, जनरल सुलेमानी अब नहीं बचा।’
अमेरिकी संसद को नहीं थी हमले की जानकारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराक में किए गए हवाई हमले के बारे में अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को भी पहले से कुछ भी नहीं बताया। वरिष्ठ डेमोक्रेट नेता और विदेश मामले की समिति के चेयरमैन एलियट एंगेल ने कहा, यह सच है कि सुलेमानी हिंसा के मास्टरमाइंड रहे हैं। उन पर अमेरिकियों के खून का इल्जाम भी है लेकिन कांग्रेस को भरोसे में लिए बिना इस कार्रवाई में गंभीर कानूनी समस्याएं हैं।
अमेरिकी हमले के बाद ईरान के बदला लेने की धमकी से पूरे विश्व में हड़कंप मच गया है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों से तत्काल इराक छोड़ देने की अपील की। इसके बाद इराकी तेल कंपनियों के अमेरिकी कर्मचारी वापस लौटने लगे हैं। ब्रिटिश विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने भी अपने नागरिकों को इराक से लौटने की सलाह दी है। ब्रिटेन ने मध्य-पूर्व में अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है। इराक में ही ब्रिटेन के करीब 400 सैन्य अधिकारी तैनात हैं। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ग्रीस का दौरा बीच में ही छोड़कर स्वदेश लौट आए हैं। इस्राइल सेना के रेडियो ने बताया कि देश की सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
मध्य-पूर्व में बिगड़ सकते हैं हालात : विशेषज्ञ
मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) के विशेषज्ञों का मानना है कि इन बड़े सैन्य अधिकारियों की मौत इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट है। माना जा रहा है कि ईरान इस हमले का करारा जवाब देगा, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं। यही नहीं जवाबी हमलों से अमेरिकी और इजराइली हितों को नुकसान भी हो सकता है। पिछले साल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव उपजा था जो समय के साथ और बढ़ता जा रहा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने जनरल कासिम सुलेमानी को अमेरिकी हमले में मार गिराए जाने को बेहद खतरनाक और मूर्खतापूर्ण कृत्य करार दिया है। ईरान ने अपने उच्चाधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने अमेरिकी कदम को मूर्खतापूर्ण बताते हुए ट्विटर पर कहा कि वाशिंगटन को अपने इस दुष्ट कारनामे की वजह से होने वाले परिणामों की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। ईरानी जनरल की हत्या उसके लिए बेहद खतरनाक साबित होगी। इस हमले से हैरत में पड़ी ईरान सरकार का कहना है कि वह इसका गंभीर बदला लेगी। ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की संज्ञा दी।
तेहरान ने स्विस राजदूत को तलब किया
ईरान ने हमले के बाद अपने यहां मौजूद स्विट्जरलैंड के राजदूत को तलब कर नाराजगी जताई। स्विस राजदूत ही ईरान में अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ईरानी न्यूज एजेंसी इरना के हवाले से बताया गया है कि इस हत्या के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन सबसे ईरान सख्त बदला लेगा।