अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से हमलों का सिलसिला जारी है। आतंकियों ने मंगलवार को राजधानी काबुल में सैन्य अस्पताल के बाहर एक बड़े हमले को अंजाम दिया। अस्पताल के गेट के पास हुए में दो धमाकों और गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 35 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। हालांकि इसके पीछे इस्लामिक स्टेट का हाथ बताया जा रहा है।
तालिबान के आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता कारी सईद खोस्ती ने बताया कि विस्फोट मध्य काबुल में 400 बेड वाले सरदार मोहम्मद दाऊद खान अस्पताल के प्रवेश द्वार पर हुआ। सुरक्षा बलों को मौके पर भेज दिया गया है। घटना कुल कितने लोग मारे गए अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। तालिबान के एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल से लगभग तीन किमी दूर इतालवी सहायता समूह द्वारा चलाए जाने वाले ट्रॉमा अस्पताल में नौ घायलों को लाया जा चुका है।
स्थानीय लोगों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में शहर के वजीर अकबर खान इलाके में पूर्व राजनयिक क्षेत्र के पास धुएं का गुबार उठता दिखाई दे रहा है। अधिकारियों ने बताया अभी तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। आधिकारिक बख्तर न्यूज एजेंसी ने प्रत्यक्षदशियों के हवाले से बताया कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाके अस्पताल में दाखिल हुए थे और उनकी सुरक्षा बलों से मुठभेड़ हुई।
अस्पताल में मौजूद एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि एक उसने एक बड़ा धमाका सुना और उसके बाद कुछ मिनट गोलियां चलीं। लगभग दस मिनट बाद के एक दूसरा बड़ा धमाका हुआ। हालांकि विस्फोट और गोलियां अस्पताल परिसर के अंदर चलीं या बाहर उसने यह स्पष्ट नहीं किया।
तालिबान के कब्जे के बाद से बढ़े हमले
अफगानिस्तान में तालिबान के अगस्त में पश्चिम समर्थित सरकार पर काबिज होने के बाद से यहां धमाकों, हमलों और हत्या की घटनाएं तेजी से बढ़ी है। इन हमलों ने दशकों बाद तालिबान के अफगानिस्तान में सुरक्षा बहाल करने के दावों को कमजोर कर दिया है। घटना में आईएस का हाथ होने की संभावना जताई जा रही है। आईएस ने यहां तालिबान के कब्जे के बाद से मस्जिदों व अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाते हुए हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया है। आईएस ने यहां 2017 में अस्पताल में बड़ा हमला किया था। उसमें कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी।