अमेजन, यूनाइटेड एयरलाइंस, टायसन फूड्स, वॉलमार्ट, और वॉल्ट डिज्नी जैसी कंपनियां ऐसा कदम पहले ही उठा चुकी हैँ। लेकिन कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के लिए टीका लगवाना अब तक अनिवार्य नहीं किया है। इन्वेस्टमेंट परामर्श कंपनी वेल्थ एलायंस के प्रबंध निदेशक एरिक डिटॉन ने सोमवार को टीवी चैनल एनबीसी से कहा- ‘मुझे लगता है कि पूर्ण मंजूरी मिलने के बाद अब अधिक कंपनियां, राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन टीकाकरण को अनिवार्य बनाएंगी। टीकाकरण की दर बढ़ने पर कोविड का प्रभाव घटेगा। उसका तुरंत असर अर्थव्यवस्था की मजबूती के रूप में दिखेगा।’
इस टीवी चैनल से बातचीत में लॉ फर्म कॉजेन ओ कॉनर के श्रम एवं रोजगार विभाग के उपाध्यक्ष माइकल श्मिड्ट ने भी उम्मीद जताई कि अब वैक्सीन को लेकर शक जताने वाले लोग अधिक अलग-थलग पड़ जाएंगे। कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि पूर्ण मंजूरी के बाद अब कंपनियां और संगठनों के लिए यह प्रावधान करना भी संभव हो जाएगा कि उनके यहां उन्हीं ग्राहकों को प्रवेश दिया जाएगा, जिन्होंने टीका लगवा लिया है। इससे यात्रा और अवकाश उद्योग में भी तेजी आ सकती है।
लेकिन जो लोग राजनीतिक आधार पर टीकाकरण के खिलाफ हैं, उन पर इसका क्या असर होगा, ये कहना मुश्किल है। वैक्सीन विरोधी आंदोलन अमेरिका के साथ-साथ यूरोप और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीपों में भी लगातार मजबूत बना हुआ है। बीते हफ्ते ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में लॉकडाउन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इसलिए अमेरिका में अभी भी ये बात भरोसे से कहने को तैयारी नहीं है कि अब वहां 100 फीसदी टीकाकरण का रास्ता खुल गया है।