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चीन के बीआरआई के जवाबी प्रोजेक्ट का यूरोपियन यूनियन ने तैयार किया ड्राफ्ट

Thu, 08 Jul 2021 06:44 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स

सार

चीन का दावा है कि उसकी परियोजना ने दुनिया के अविकसित देशों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। बीते सोमवार को जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अपनी फोन पर हुई शिखर वार्ता में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यही बात दोहराई...
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बीआरईआई प्रोजेक्ट - फोटो : For Refernce Only
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विस्तार
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यूरोपियन यूनियन से जुड़े देशों ने अब चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना के जवाब में अपना प्रोजेक्ट शुरू करने पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। इस बारे में उन्होंने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम ने अपनी एक खास खबर में बताया कि उसके पत्रकारों ने इस ड्राफ्ट का मसौदा देखा है। इसमें यूरोपीय आयोग को सुझाव दिया है कि अगले नौ महीनों के अंदर वह बड़े प्रभाव और प्रोफाइल वाली परियोजनाओं की लिस्ट तैयार करे, जो दुनिया का ध्यान खींच सके। वेबसाइट पॉलिटिको के मुताबिक संभव है कि अगले सोमवार को ईयू के विदेश मंत्री इस ड्राफ्ट पर दस्तखत कर दें।

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ड्राफ्ट में कहा गया है कि ईयू के सामने सबसे पहला काम अपनी परियोजना का एक आकर्षक नाम तय करना और उसका लोगो बनवाना है। ड्राफ्ट के मुताबिक ईयू इस बात से वाकिफ है कि चीन की परियोजना आठ साल से चल रही है। उस पर ढाई ट्रिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। ये परियोजना दुनिया के कई हिस्सों में पहुंच चुकी है। इसलिए अब इसका जवाब अगर बड़ा नहीं दिखा, तो वह अपना असर पैदा नहीं कर पाएगा।

चीन का दावा है कि उसकी परियोजना ने दुनिया के अविकसित देशों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। बीते सोमवार को जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अपनी फोन पर हुई शिखर वार्ता में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यही बात दोहराई। गौरतलब है कि पिछले महीने जी-7 देशों ने अपने शिखर सम्मेलन में चीन की बीआरआई परियोजना का वैकल्पिक प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया था।
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ईयू के ड्राफ्ट के मुताबिक नई परियोजना के तहत वह 2018 में शुरू की गई ईयू-एशिया कनेक्टिविटी स्ट्रेटेजी से आगे बढ़ा जाएगा। नई परियोजना पूरी दुनिया के लिए होगी। इसमें अफ्रीका और लैटिन अमेरिका पर खास ध्यान दिया जाएगा। गौरतलब है कि चीन की परियोजना में भी इन्हीं क्षेत्रों में सबसे ज्यादा निवेश किया गया है। ड्राफ्ट में सुझाव दिया गया है कि ईयू की परियोजना का नाम ऐसा होना चाहिए, जिससे यूरोप के सॉफ्ट पॉवर का संदेश सारी दुनिया को जाए।

ड्राफ्ट में धन जुटाने के लिए सुझाव दिया गया है कि इसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों को जोड़ा जाए। ड्राफ्ट में यूरोपीय आयोग से कहा गया है कि वह प्रोजेक्ट की फाइनेंसिंग (धन उपलब्धता) के बारे में एक सरलीकृत योजना तैयार करे। इसे इस रूप में तैयार किया जाए, जिससे कनेक्टिविटी क्षेत्र में टिकाऊ निवेश का रास्ता खुल सके। यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक और यूरोपियन बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट को भी इस परियोजना से जोड़ने का सुझाव दिया है।

लेकिन वेबसाइट पॉलिटिको की टिप्पणी में कहा गया है कि ड्राफ्ट में प्राइवेट कंपनियों को जोड़ने की जो योजना सुझाई गई है, वह कमजोर है। उसके मुताबिक राजनेता जिन क्षेत्रों में निवेश को रणनीतिक महत्व का समझते हैं, अकसर कंपनियां उन क्षेत्रों को जोखिम भरा मानती हैं। राजनेताओं का मकसद सियासी और कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाना होता है, जबकि कंपनियां अपने मुनाफे को ध्यान में रख कर निवेश का फैसला करती हैं। विश्लेषकों के मुताबिक इस बारे में आम सहमति बना पाना एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

ब्रसेल्स, 8 जुलाई। यूरोपियन यूनियन से जुड़े देशों ने अब चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना के जवाब में अपना प्रोजेक्ट शुरू करने पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। इस बारे में उन्होंने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम ने अपनी एक खास खबर में बताया कि उसके पत्रकारों ने इस ड्राफ्ट का मसौदा देखा है। इसमें यूरोपीय आयोग को सुझाव दिया है कि अगले नौ महीनों के अंदर वह बड़े प्रभाव और प्रोफाइल वाली परियोजनाओं की लिस्ट तैयार करे, जो दुनिया का ध्यान खींच सके। वेबसाइट पॉलिटिको के मुताबिक संभव है कि अगले सोमवार को ईयू के विदेश मंत्री इस ड्राफ्ट पर दस्तखत कर दें।

ड्राफ्ट में कहा गया है कि ईयू के सामने सबसे पहला काम अपनी परियोजना का एक आकर्षक नाम तय करना और उसका लोगो बनवाना है। ड्राफ्ट के मुताबिक ईयू इस बात से वाकिफ है कि चीन की परियोजना आठ साल से चल रही है। उस पर ढाई ट्रिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। ये परियोजना दुनिया के कई हिस्सों में पहुंच चुकी है। इसलिए अब इसका जवाब अगर बड़ा नहीं दिखा, तो वह अपना असर पैदा नहीं कर पाएगा।

चीन का दावा है कि उसकी परियोजना ने दुनिया के अविकसित देशों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। बीते सोमवार को जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अपनी फोन पर हुई शिखर वार्ता में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यही बात दोहराई। गौरतलब है कि पिछले महीने जी-7 देशों ने अपने शिखर सम्मेलन में चीन की बीआरआई परियोजना का वैकल्पिक प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया था।

ईयू के ड्राफ्ट के मुताबिक नई परियोजना के तहत वह 2018 में शुरू की गई ईयू-एशिया कनेक्टिविटी स्ट्रेटेजी से आगे बढ़ा जाएगा। नई परियोजना पूरी दुनिया के लिए होगी। इसमें अफ्रीका और लैटिन अमेरिका पर खास ध्यान दिया जाएगा। गौरतलब है कि चीन की परियोजना में भी इन्हीं क्षेत्रों में सबसे ज्यादा निवेश किया गया है। ड्राफ्ट में सुझाव दिया गया है कि ईयू की परियोजना का नाम ऐसा होना चाहिए, जिससे यूरोप के सॉफ्ट पॉवर का संदेश सारी दुनिया को जाए।

ड्राफ्ट में धन जुटाने के लिए सुझाव दिया गया है कि इसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों को जोड़ा जाए। ड्राफ्ट में यूरोपीय आयोग से कहा गया है कि वह प्रोजेक्ट की फाइनेंसिंग (धन उपलब्धता) के बारे में एक सरलीकृत योजना तैयार करे। इसे इस रूप में तैयार किया जाए, जिससे कनेक्टिविटी क्षेत्र में टिकाऊ निवेश का रास्ता खुल सके। यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक और यूरोपियन बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट को भी इस परियोजना से जोड़ने का सुझाव दिया है।

लेकिन वेबसाइट पॉलिटिको की टिप्पणी में कहा गया है कि ड्राफ्ट में प्राइवेट कंपनियों को जोड़ने की जो योजना सुझाई गई है, वह कमजोर है। उसके मुताबिक राजनेता जिन क्षेत्रों में निवेश को रणनीतिक महत्व का समझते हैं, अकसर कंपनियां उन क्षेत्रों को जोखिम भरा मानती हैं। राजनेताओं का मकसद सियासी और कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाना होता है, जबकि कंपनियां अपने मुनाफे को ध्यान में रख कर निवेश का फैसला करती हैं। विश्लेषकों के मुताबिक इस बारे में आम सहमति बना पाना एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

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