काबुल में खुलेआम ड्रग्स पीते हुए अफगानी।
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अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक 2020 में अफगानी किसानों ने 2,300 टन अफीम की खेती की। दुनिया में अफीम के गैर-कानूनी कारोबार में अफगानिस्तान में पैदा होने वाले अफीम का हिस्सा 90% से भी ज्यादा बना रहा है। ब्रिटेन में अवैध रूप से 95% अफीम अफगानिस्तान से सप्लाई होती है।
खुद नशे में बर्बाद हो रहा अफगानिस्तान
तालीबानी हर रात काबुल के अलग-अलग इलाकों में रेड डालकर नशेड़ियों को पकड़ रहे हैं।
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दुनिया को नशे की लत में धकेलने वाला अफगानिस्तान अब खुद नशे की लत में बर्बाद होने लगा है। हालात ये है कि सड़कों पर कोकीन, अफीम और ड्रग्स के लिए बच्चे से लेकर युवा और बुजुर्ग तक तड़प रहे हैं। देश में बढ़ते नशे की लत से तालिबान भी परेशान हो गया है।
तालिबान लड़ाकों की स्पेशल टीम नजर रख रही
नशे के लती अफगानियों को पीटकर तालीबानी अस्पतालों में भर्ती करा रहे हैं।
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अफगानी नागरिकों में नशे की बढ़ती लत से परेशान तालिबान ने लड़ाकों की नई फौज तैयार की है। ये फौल रात में अलग-अलग जगहों पर रेड डालते हैं। काबुल में पुलों के नीचे, कूड़ों के ढेर के पास और गलियों में बैठने वाले नशेड़ियों को पकड़ा जा रहा है। उन्हें पीटा जाता है। हाथ-पैर बांधकर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता है।
अस्पतालों में हालात हुए खराब
गाड़ियों में भरकर नशेड़ियों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
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अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर फजलराबी मय्यर कहते हैं,'यहां बिल्कुल भी लोकतंत्र नहीं बची है। तानाशाही तरीके से काम हो रहा है। हमारे ऊपर दबाव होता है कि हम सबका इलाज करें। अफगानी लागों में हीरोईन, अफीम और मथ जैसे नशे की लत ज्यादा है।' अस्पतालों में भी हालात खराब होने लगे हैं। नशे की लत में डूबे बड़ी संख्या में लोगों को भर्ती कराया गया है। ये लोग पत्थर चलाते हैं और हमला करते हैं।
तालिबान सरकार बनते ही आदेश जारी हुआ था
बड़ी संख्या में नशेड़ी पुल या सुनसान इलाकों में ड्रग्स लेने के लिए जुटते हैं।
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एक डॉक्टर बताते हैं कि जैसे ही 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, मंत्रालय की तरफ से सभी अस्पतालों को आदेश जारी हो गए। तालिबानी हुकूमत ने कहा है कि किसी भी हालत में नशे की समस्या को खत्म करना है।
ड्रग्स पर काबू पाना आसान नहीं
यूरोपीय जानकारों का कहना है कि तालिबान के लिए ड्रग्स के कारोबार पर काबू पाना आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि अफगानिस्तान के कई प्रांतों में अफीम की खेती ही बहुत से लोगों की आमदनी का एकमात्र जरिया है। इसके अलावा अपने पिछले शासनकाल के शुरुआती वर्षों में तालिबान ने ड्रग्स को अपनी आय का स्रोत भी बना रखा था। हालांकि अपने शासन के आखिरी दो वर्षों में उसने अफीम की खेती को रोकने की कोशिश की थी।
तालिबान ने कहा था अफीम की खेती का केंद्र नहीं बनने देंगे
हर शाम को नशेड़ी ड्रग्स की तलाश में शहर की सड़कों पर घूमते हैं।
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इस बार सत्ता पर कब्जे के बाद तालिबान ने कहा है कि वह अफगानिस्तान को अफीम की खेती का केंद्र नहीं रहने देगा। काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस मे तालिबान के प्रवक्ता जुबिहुल्लाह मुजाहिद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की थी कि वह अफीम की खेती रोकने में तालिबान की मदद करे। जानकारों का कहना है कि अभी तालिबान अफीम से होने वाली आय पर निर्भर नहीं है। हालांकि उससे होने वाली आय का वह इस्तेमाल जरूर करता रहा है। अब चूंकि पश्चिमी देशों ने अफगानिस्तान के लिए अपनी सहायता रोक दी है, इसलिए ये आशंका बढ़ी है कि तालिबान की अफीम के कारोबार पर निर्भरता बढ़ सकती है।
यूरोप में बढ़ सकती है हेरोइन की सप्लाई
काबुल की सड़कों पर ड्रग्स के लिए तड़पकर कई लोगों की मौत हो चुकी है।
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प्रोफेसर जोनाथन गुडहैंड की राय है कि इस वक्त अफीम की खेती रोकना किसी की प्राथमिकता नहीं है। इसलिए इसमें बढ़ोतरी जारी रहेगी। इससे यूरोप में अफीम से बनने वाले मादक पदार्थ हेरोइन की आपूर्ति बढ़ सकती है। उससे लोगों को सस्ते में हेरोइन उपलब्ध हो सकता है। ब्रिटेन के पूर्व मंत्री जेरमी हंट ने कहा है कि अफगानिस्तान से फौज वापसी के विनाशकारी फैसले के जो बुरे परिणाम संभावित हैं, उनमें एक पूरी दुनिया में हेरोइन की आपूर्ति में बढ़ोतरी भी है।
ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी के मुताबिक अफगानिस्तान में पहले से ही अफीम की खेती बढ़ रही थी। अब पश्चिमी सेनाओं की वापसी से देश में पैदा हुई अस्थिरता का असर इसकी पैदावार पर पड़ सकता है। इसलिए अब जरूरी है कि सभी देश मिल कर ड्रग्स कारोबार और उससे जुड़े गंभीर अपराधों का मुकाबला करने की रणनीति बनाएं।