पंजशीर घाटी में मोर्चा ले रही एनआरएफ का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद ने कहा कि तालिबान के साथ मिलकर पाकिस्तान ने बमबारी की, जिसमें संगठन के प्रवक्ता फहीम दस्ती और मसूद के परिवार के कई लोग मारे गए। उन्होंने लोगों से तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन करने की अपील की। मसूद ने खुद को सुरक्षित बताया।
अहमद मसूद ने 19 मिनट के वीडियो संदेश में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगते हुए दोहराया कि प्रतिरोध खत्म नहीं होगा। मसूद ने कहा पाकिस्तान ने अफगानों पर सीधा हमला किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे चुपचाप देख रहा है। जब तक मेरे खून की आखिरी बूंद बाकी है, मैं हार नहीं मान सकता।
उन्होंने तालिबानियों को जंगली करार दिया, जिन्होंने पाकिस्तान की मदद लेकर हमला किया। मसूद ने कहा, तालिबान ने साबित कर दिया कि वे अफगान नहीं हैं, वे बाहर से आए हैं और अफगानिस्तान को बाकी दुनिया से अलग रखना चाहते हैं। हर अफगानी को उनके खिलाफ प्रतिरोध करना होगा, चाहे जैसे भी करें। प्रतिरोध अब भी जिंदा है।
तालिबानी शरिया मानते हैं न कुरान
मसूद ने कहा अफगानिसतान की उलमा परिषद ने दुश्मनी छोड़कर बातचीत का सुझाव दिया था, इसी वजह से एनआरएफ ने तालिबान को बातचीत की पेशकश की थी। इसके जवाब में उसने बड़ी संख्या में आतंकी भेजकर पंजशीर पर कब्जा किया, यह दर्शाता है कि तालिबानी न शरिया को मानते हैं न कुरान को।
मसूद ने कहा कि तालिबानियों ने बड़ी संख्या में नागरिकों को मारा, उनके कई करीबी मारे गए हैं। इन मौतों ने उन्हें कमजोर नहीं किया है, न उनकी हिम्मत टूटी है।
मसूद ने कहा कि विदेशियों (पाकिस्तानी) ने तालिबानियों को अपना गुंडा बनकर उन्हें देश पर थोपा है। अफगानिस्तान का भविष्य एक पिछड़े हुए देश के रूप में नजर आ रहा है, जहां सभ्यता, कला, एकता और समभाव नहीं होंगे। वे ऐसा देश बनाने जा रहे हैं जो राजनीतिक और आर्थिक रूप से विश्व से कटा हुआ होगा। विश्व से स्वतंत्र संपर्क या संबंध भी नहीं रख पाएगा।
तालिबान को वैधता देने के लिए विश्व जिम्मेदार
मसूद ने वैश्विक समुदाय को तालिबान को यह मौका देने का जिम्मेदार बताया, जिससे वह राजनीतिक वैधता पा रहा है। जबकि दिख रहा है कि तालिबान सुधरा नहीं है, बल्कि ज्यादा क्रूर और बर्बर हो चुका है। वह पहले से ज्यादा मजहबी कट्टरता और भेदभावों से भरा हुआ है। आज अफगान देख रहे हैं कि कौन सा देश उनके साथ खड़ा है और कौन तालिबान के।