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अफगानिस्तान: इंटरनेट और नौकरियों का लालच देकर नौजवानों को लुभाने में कामयाब हुआ तालिबान

Mon, 06 Sep 2021 05:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल

सार

निक्कई एशिया से बातचीत में कुछ तालिबान लड़ाकों ने जल्द ही दूसरी या तीसरी शादी करने का इरादा जताया। एक 50 वर्षीया महिला ने वेबसाइट से कहा- तालिबान कहता है कि वह बदल गया है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। छह महीनों के अंदर जैसे ही अंतरराष्ट्रीय ध्यान अफगानिस्तान से हट जाएगा, वह महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर रोक लगा देगा...
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अफगानिस्तान में तालिबानी लड़ाके - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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तालिबान जितनी आसानी से पिछले महीने काबुल पर कब्जा करने में सफल रहा, उसकी वजह अफगान नौजवानों का समर्थन पाने में उसकी कामयाबी है। अब छप रहे मीडिया विश्लेषणों में कहा गया है कि दो दशक तक चले युद्ध के दौरान तालिबान ने खुद को काफी हद तक बदला। उसने सोशल मीडिया के जरिए गरीब नौजवानों से संपर्क किया। उन्हें काम दिलाने का वादा किया। ऐसे तौर-तरीकों के जरिए उसने अपनी नई ताकत बनाई है।

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विश्लेषकों का कहना है कि 1996 में जब तालिबान सत्ता में आया था, तब उसने टेलीविजन और संगीत पर रोक लगा दी थी। उसने लड़कियों का स्कूल जाना रोक दिया था। लेकिन बीते दो दशक में उसने आधुनिक समय की जरूरतों के मुताबिक खुद को बदला है। उसने इंटरनेट और स्मार्टफोन को न सिर्फ स्वीकार किया है, बल्कि उनके इस्तेमाल में महारत भी हासिल की है।

वेबसाइट निक्कई एशिया से बातचीत में काबुल स्थित एक नौजवान तालिबान लड़ाके ने कहा- ‘हम सुबह पांच बजे उठते हैं। तब हम नमाज पढ़ते हैं और कुरान का पाठ करते हैं। उसके बाद नाश्ता करते हैं और फिर सात बजे से हम काम शुरू कर देते हैं। उस दौरान हम स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं।’ उसने बताया कि वह शाम छह बजे घर लौटने के बाद स्मार्टफोन पर खबरें पढ़ता है। उसके बाद फोन पर बातचीत करता है। लेकिन वह फिल्म नहीं देखता। इस तरह का कोई मनोरंजन वह नहीं करता। इसके बदले अपनी पत्नी और बच्चों के साथ समय गुजरता है।
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तालिबान का गठन 1994 में हुआ था। इस समय अनुमान है कि उसके पास 50 हजार से 80 हजार तक लड़ाके हैं। जब यह पिछली बार सत्ता में था, तब अफगानिस्तान में इंटरनेट नहीं पहुंचा था। लेकिन तालिबान से जुड़े लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया साइटों पर अपने पोस्ट भी डालते हैं। काबुल पर कब्जे के बाद कई तालिबान लड़ाके स्लेफी लेते देखे गए थे। तालिबान की अब यह राय बनी है कि ऑनलाइन मौजूदगी के बिना वह नौजवानों का समर्थन हासिल नहीं कर सकता। उस हालत में उसके विरोधी गुट मजबूत हो सकते हैं।

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विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान को मिले नौजवानों के समर्थन की सबसे बड़ी वजह उसका काम दिलाने का वादा है। अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त है। 2019 में थिंक टैंक एशिया फाउंडेशन के एक सर्वे में 70 फीसदी लोगों ने कहा था कि उनके पास रोजगार के अवसर नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि तालिबान की ताकत कितनी बनी रहेगी, वह असल में नौकरियों के मोर्चे पर उसकी कामयाबी से ही तय होगा। वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक उससे बातचीत में कई नौजवानों ने कहा कि उन्होंने तालिबान के हक में लड़ाई लड़ी, क्योंकि उनको आशा है कि तालिबान सरकार उनकी आमदनी बढ़ाने वाले उपाय करेगी।

लेकिन इस रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं के प्रति तालिबान का नजरिया नहीं बदला है। निक्कई एशिया से बातचीत में कुछ तालिबान लड़ाकों ने जल्द ही दूसरी या तीसरी शादी करने का इरादा जताया। एक 50 वर्षीया महिला ने वेबसाइट से कहा- तालिबान कहता है कि वह बदल गया है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। छह महीनों के अंदर जैसे ही अंतरराष्ट्रीय ध्यान अफगानिस्तान से हट जाएगा, वह महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर रोक लगा देगा।
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