विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान को मिले नौजवानों के समर्थन की सबसे बड़ी वजह उसका काम दिलाने का वादा है। अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त है। 2019 में थिंक टैंक एशिया फाउंडेशन के एक सर्वे में 70 फीसदी लोगों ने कहा था कि उनके पास रोजगार के अवसर नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि तालिबान की ताकत कितनी बनी रहेगी, वह असल में नौकरियों के मोर्चे पर उसकी कामयाबी से ही तय होगा। वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक उससे बातचीत में कई नौजवानों ने कहा कि उन्होंने तालिबान के हक में लड़ाई लड़ी, क्योंकि उनको आशा है कि तालिबान सरकार उनकी आमदनी बढ़ाने वाले उपाय करेगी।
लेकिन इस रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं के प्रति तालिबान का नजरिया नहीं बदला है। निक्कई एशिया से बातचीत में कुछ तालिबान लड़ाकों ने जल्द ही दूसरी या तीसरी शादी करने का इरादा जताया। एक 50 वर्षीया महिला ने वेबसाइट से कहा- तालिबान कहता है कि वह बदल गया है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। छह महीनों के अंदर जैसे ही अंतरराष्ट्रीय ध्यान अफगानिस्तान से हट जाएगा, वह महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर रोक लगा देगा।