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Russia: राष्ट्रपति पुतिन का आदेश, मध्यम दूरी की मिसाइल का उत्पादन शुरू करेगा रूस; अमेरिका ने लगाया था प्रतिबंध

Fri, 28 Jun 2024 10:03 PM IST
मिथिलेश नौटियाल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

Russia: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मध्यम दूरी की मिसाइलों का उत्पादन शुरू करने का आदेश दिया है। बता दें कि इन मिसाइलों के उत्पादन पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था। 

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व्लादिमीर पुतिन - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मध्यम दूरी की मिसाइलों का उत्पादन शुरू करने का आदेश दिया है। बता दें कि इन मिसाइलों के उत्पादन पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था। इसके लिए रूस और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ था, जो कि अब खत्म हो गया है। 

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1988 में हुई थी आईएनएफ संधि
वर्ष 1988 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस (आईएनएफ) संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत सभी मध्यम दूरी मिसाइलों और कम दूरी के रॉकेट लॉन्चर के उत्पादन को खत्म करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2019 में अमेरिका ने रूस पर उल्लंघनों का आरोप लगाते हुए इस संधि से खुद को अलग कर दिया था।

व्लादिमीर पुतिन ने क्या कहा?
अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान कहा ‘हमें इन मिसाइलों के उत्पादन को शुरू कर देना चाहिए। इन मिसाइलों को ऐसे स्थानों पर रखना चाहिए, जहां से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित हो।’ पुतिन का कहना है कि रूस ने वर्ष 2019 से संधि के खत्म होने के बाद से इन मिसाइलों का उत्पादन नहीं किया है। उन्होंने कहा ‘अब सब जानते हैं कि अमेरिका में ना सिर्फ इन मिसाइलों का उत्पादन हो रहा है बल्कि इन्हें परीक्षण के लिए यूरोप भी लाया गया है। हाल ही में अमेरिका ने घोषणा की है कि फिलीपींस को भी इन मिसाइलों को सौंपा गया है।’ आईएनएफ संधि का अंत अमेरिका और रूस के बीच संबंधों की तनातनी में बड़ा कदम साबित हुआ है।
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अब दोनों देशों के बीच बचा है एकमात्र समझौता
अमेरिका और रूस के बीच अब अस्त्र नियंत्रण संधि के रूप में अब एकमात्र समझौता बचा हुआ है, जो कि वर्ष 2026 में खत्म हो जाएगा। इस समझौते के तहत किसी भी देश द्वारा 1550 से अधिक परमाणु हथियार और 700 से अधिक मिसाइलों को तैनात नहीं किया जा सकता। दरअसल इस समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत की कमी देखने को मिली है।
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