पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को बड़ी राहत दी और इमरान की पार्टी पीटीआई की सहयोगी सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल को आरक्षित सीटें देने का आदेश दिया। विवाद नेशनल असेंबली की महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित 70 सीटों और चार विधानसभाओं की 156 सीटों में हिस्सा को लेकर था। पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल के आरक्षित सीटों पर दावे को नकार दिया था। जिसके खिलाफ काउंसिल ने पेशावर उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, लेकिन उच्च न्यायलय से भी सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल को निराशा हाथ लगी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है।
13 सदस्यीय पीठ ने दिया फैसला
मुख्य न्यायाधीश ईसा की अध्यक्षता वाली 13 सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। जिसमें न्यायाधीश सैयद मंसूर अली शाह, मुनीब अख्तर, याह्या अफरीदी, अमीनुद्दीन खान, जमाल मंडोखैल, मुहम्मद अली मजहर, आयशा मलिक, अतहर मिनल्लाह, सैयद हसन रिजवी, शाहिद वहीद, इरफान सआदत खान और नईम अख्तर अफगान शामिल थे। मुख्य न्यायाधीश ईसा ने मंगलवार को कार्यवाही के बाद आपसी परामर्श के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो शुक्रवार को सुनाया गया। पैनल के आठ न्यायाधीशों के बहुमत ने पेशावर उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल के पक्ष में फैसला सुनाया।
क्या था आरक्षित सीटों को लेकर विवाद
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) 8 फरवरी को हुए आम चुनाव में चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़ सकी थी क्योंकि चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव चिन्ह खारिज कर दिया था। जिसके बाद पीटीआई महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीटों पर दावा नहीं कर सकी, जो आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर राजनीतिक पार्टियों को दी जाती हैं।
ऐसे में आरक्षित सीटों पर दावे के लिए पीटीआई समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल में शामिल हो गए थे। इसके बाद सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल ने आरक्षित सीटों पर दावा किया, लेकिन पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल के दावे को खारिज कर दिया और कहा कि पीटीआई समर्थित उम्मीदवारों ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और नतीजों के बाद सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल में शामिल हुए थे।
चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल ने पेशावर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, लेकिन हाईकोर्ट से भी सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल को झटका लगा और हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को सही बताया। इसके बाद सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख करते हुए वहां याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल के पक्ष में फैसला सुनाया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सरकार पर खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन विधानसभाओं में विपक्ष का दबदबा बढ़ सकता है।