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किम जोंग-उन: परमाणु हथियारों के विकास के लिए उत्तर कोरिया ने बनाया कानून, अमेरिका की बढ़ सकती है परेशानी

Thu, 28 Sep 2023 10:56 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्योंगयांग

सार

उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग-उन ने उत्तर कोरियाई संसद में कहा कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों से प्योंगयांग को मिल रही चुनौती और इसके परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने की मंशा के मद्देनजर यह कदम उठा रहे हैं।
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उत्तर कोरिया तानाशाह किम जोंग उन - फोटो : Agency
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विस्तार
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उत्तर कोरिया ने एक अहम बदलाव के तहत परमाणु हथियारों के तेज विकास की नीति को अब अपने संविधान में शामिल कर लिया है। अब कानून बनने के बाद उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के विकास में तेजी आ सकती है। उत्तर कोरिया का यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया से अपील की जा रही है कि वह बातचीत की मेज पर लौटे। इस बातचीत के जरिए उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार कार्यक्रम ना चलाने के लिए अमेरिका से आर्थिक मदद मिलनी है। 
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किम जोंग-उन ने कही ये बात
उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग-उन ने उत्तर कोरियाई संसद (सुप्रीम पीपल्स असेंबली) के सत्र के दौरान कहा कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों से प्योंगयांग को मिल रही चुनौती और इसके परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने की मंशा के मद्देनजर यह कदम उठा रहे हैं। उत्तर कोरियाई तानाशाह ने कहा कि 'उत्तर कोरिया की परमाणु बल तैयार करने की नीति को अब देश के आधारभूत कानून की तरह स्थायी बनाया जा रहा है, जिसका उल्लंघन करने की किसी को भी अनुमति नहीं होगी।' उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया केसीएनए ने कहा है कि किम जोंग उन ने परमाणु हथियारों के उत्पादन में तेजी लाने और परमाणु हमले की क्षमताओं में विविधता लाने के साथ ही इन्हें सेना की विभिन्न सेवाओं में तैनात करने की जरूरत पर भी बल दिया। 

रूस से मिल सकती है मदद
किम जोंग-उन हाल ही में रूस के दौरे से लौटे हैं, जहां उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। रूस दौरे पर किम जोंग उन ने कई हथियार निर्माता कंपनियों के प्लांट्स का दौरा किया। किम जोंग-उन का यह दौरा ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर आरोप लगाया है कि नॉर्थ कोरिया, यूक्रेन युद्ध के बीच रूस को हथियारों की सप्लाई कर रहा है। माना जा रहा है कि उत्तर कोरिया और रूस के बीच नागरिक परमाणु कार्यक्रम की तकनीक के ट्रांसफर पर बातचीत हो सकती है। ऐसी भी आशंका है कि उत्तर कोरिया इस डील के तहत मिले मैटेरियल का इस्तेमाल अपने परमाणु मिसाइल कार्यक्रम को बढ़ाने में भी कर सकता है। 
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