पिछले साल विदेशों में काम करने वाले एल सल्वाडोर के लोगों ने कमा कर छह अरब डॉलर वापस अपने देश में भेजा था। यह एल सल्वाडोर की आय का एक बड़ा स्रोत है। एल सल्वाडोर की सालाना अर्थव्यवस्था 26 अरब डॉलर की है। विरोधियों का कहना है कि जब ये रकम बिटकॉइन में लग जाएगी, तब अगर अचानक उस क्रिप्टोकरेंसी की कीमत गिरी, तो देश कंगाल हो जाएगा। अभी एल सल्वाडोर की मुद्रा अमेरिकी डॉलर है।
एल सल्वाडोर के सेंट्रल बैंक के गवर्नर रह चुके कार्लस एचेवेदो ने ग्रीस के अखबार ग्रीक रिपोर्टर से बातचीत में कहा- ‘बिटकॉइन को लीगल टेंडर (वैध मुद्रा) बनाना खतरनाक रास्ते पर चलने जैसा है।’ पिछले कुछ दिनों में बिटकॉइन विरोधी प्रदर्शनों में उतरे हजारों लोगों की राय भी ऐसी ही है। एल सल्वाडोर के सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों की यूनियन के कार्यकर्ता स्टैनली क्विंतेरोस ने ग्रीक रिपोर्टर से कहा- ‘हम जानते हैं कि इस मुद्रा के भाव में बेहद तेजी से उतार-चढ़ाव होता है। एक सेकंड में इसकी कीमत बदल जाती है। उस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होगा।’
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि एल सल्वाडोर का बड़ा बहुमत बिटकॉइन को वैध मुद्रा बनाने के खिलाफ है। ये विरोध भाव इतना ज्यादा है कि लोग क्रिप्टोकरेंसी के कॉन्सेप्ट के ही खिलाफ हो गए हैं। इस समय सारी दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बड़ी जिज्ञासा है। इसीलिए एल सल्वाडोर की घटनाओं को सारी दुनिया में बेहद दिलचस्पी से देखा जा रहा है। गौरतलब है कि चीन में क्रिप्टोकरेंसी पर रोक लगाई जा चुकी है। उसके बदले चीन अपनी डिजिटल मुद्रा बाजार में उतार चुका है।