पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीनी राष्ट्रपति के साथ बातचीत में जो भावना किशिदा ने दिखाई, उसका वैसा मजबूत संकेत उनके नीतिगत भाषण में नहीं था। इसमें उन्होंने जापान-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने की बात कही। साथ ही ‘मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए समान सोच वाले देशों के साथ’ मिल कर काम करने का इरादा जताया। उन्होंने क्वाड्रेंगुलर सिक्योरिटी डायलॉग (क्वॉड) में शामिल देशों- अमेरिका, भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ जापान का सहयोग बढ़ाने की घोषणा भी की।
मानव अधिकारों के मुद्दे पर किशिदा ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में जापान की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी बढ़ाएगी। साथ ही जलवायु परिवर्तन और परमाणु अप्रसार के मसलों को हल करने के लिए सक्रिय भागीदारी निभाएगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक मानव अधिकार के मसले को आम तौर पर चीन से जोड़ कर देखा जाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि किशिदा के इस भाषण में चीन के प्रति जापान की नीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं मिला। लेकिन उन्होंने चीन के खिलाफ आक्रामक रुख भी नहीं अपनाया। संभवतया इसे ही चीन ने एक सकारात्मक संकेत माना है। इस मामले में चीन की उम्मीदें कितनी पूरी होंगी, फिलहाल इस बारे में कुछ ठोस रूप से नहीं कहा जा सकता।