विश्लेषकों के मुताबिक हालांकि अफगानिस्तान में शिया मुसलमानों के दमन सहित कई ऐसे मसले हैं, जिनको लेकर दोनों देशों में तनाव रहा है, लेकिन अमेरिका के प्रति ईरान और तालिबान दोनों में गहरा विरोध भाव है। यही अब उनके बीच नए रिश्ते बनने का आधार बन सकता है। वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल तालिबान और ईरान दोनों की सोच यह है कि ‘अमेरिका का दुश्मन हमारा दोस्त है।’
अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के एसोसिएट प्रोफेसर जोशुआ खिफ्रिनसन ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘अमेरिका विरोधी भावना को ईरान और तालिबान ने अपनी विचारधारा बना लिया है। लेकिन बात इतनी ही नहीं है। बल्कि यह भावना उनकी चिंताओं और आपात जरूरतों को भी जाहिर करती है।’
दूसरे विश्लेषकों का भी कहना है कि ईरान और तालिबान के पास फिलहाल अमेरिका विरोध को तरजीह देने की ठोस वजहें मौजूद हैं। इस वजह से वे अपने आपसी विवादों की फिलहाल अनदेखी कर रहे हैं। इसीलिए हाल में ईरान सरकार ने यह दो टूक कहा कि वह तालिबान के साथ सामान्य संबंध बनाने का इरादा रखती है। उधर 21 अगस्त को ईरान के एक टीवी चैनल पर तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम का लंबा इंटरव्यू दिखाया गया। उसमें नईम ने कहा कि तालिबान ईरान के साथ सम्मानजक और दोस्ताना संबंध बनाना चाहता है।