सितंबर 2023 को समाप्त हुए साल भारतीय नागरिकों को 1,33,237 प्रायोजित अध्ययन वीजा दिए गए थे, जिसमें सितंबर 2022 को समाप्त हुए वर्ष की तुलना में पांच फीसदी की वृद्धि हुई, लेकिन उनकी संख्या सितंबर 2019 में समाप्त हुए साल की तुलना में अब करीब पांच गुना अधिक है।
ब्रिटेन का वीजा हासिल करने में कुशल श्रमिकों, चिकित्सा पेशेवरों और छात्रों की श्रेणियों में भारतीयों ने अपना दबदबा कायम किया है। दरअसल, गुरुवार को ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने आधिकारिक आव्रजन आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों से ही यह खुलासा हुआ है। इनमें बताया गया है कि सितंबर 2023 में समाप्त हो रहे साल के लिए ये आंकड़ा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने इकट्ठे किए हैं।
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इनके मुताबिक, भारतीय नागरिक न केवल कुशल कामगार वीजा के मामले में अव्वल हैं, बल्कि स्वास्थ्य और देखभाल वीजा के लिहाज से भी पहले नंबर पर हैं। इसी तरह छात्रों की वीजा श्रेणी में भारतीय नागरिक लगातार छात्रों के सबसे बड़े समूह का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्हें अपेक्षाकृत नए पोस्ट-स्टडी स्नातक वीजा पर बने रहने की छूट दी गई है।
इनमें यह भी बताया गया है कि कुशल कामगार वीजा में पिछले साल नौ फीसदी की मामूली वृद्धि देखी गई है। वहीं अगर बात कुशल कामगार-स्वास्थ्य और देखभाल वीजा की करें तो ये दोगुने से अधिक हो गए हैं। अब इनकी संख्या 1,43,990 हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा 38,866 भारतीय शामिल हैं। स्वास्थ्य और देखभाल वीजा के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय आवेदकों की संख्या में 76 फीसदी की वृद्धि हुई है, वहीं कुशल कामगार वीजा में 11 फीसदी की गिरावट देखी गई है।
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बता दें कि, सितंबर 2023 को समाप्त हुए साल भारतीय नागरिकों को 1,33,237 प्रायोजित अध्ययन वीजा दिए गए थे, जिसमें सितंबर 2022 को समाप्त हुए वर्ष की तुलना में पांच फीसदी की वृद्धि हुई, लेकिन उनकी संख्या सितंबर 2019 में समाप्त हुए साल की तुलना में अब करीब पांच गुना अधिक है। इसके अलावा पर्यटक वीजा के मामले में भी भारतीय नागरिकों का अनुपात सबसे अधिक 27 फीसदी रहा। भारत के बाद सबसे ज्यादा 19 फीसदी चीनी मूल के लोगों ने चीन का पर्यटक वीजा हासिल किया।