फू और सुन के बारे में खबर आने से एक हफ्ता पहले उनके निकट सहयोगी पेंग बो पर अनुशासन समिति ने पार्टी के प्रति वफादार ना रहने का आरोप लगाया था। पेंग पहले चीन की इंटरनेट सेंसर इकाई के प्रमुख थे। उन्हें पिछले अगस्त में पार्टी से निकाला गया था। खबरों के मुताबिक हाल के वर्षों में फू चौथे नेता हैं, जिन्हें अनुशासन समिति की सिफारिश पर हिरासत में लिया गया है।
विश्लेषकों के मुताबिक उनके खिलाफ आरोप में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उससे संकेत मिलता है कि वे शी जिनपिंग के खिलाफ साजिश में जुटे हुए थे। इसमें उन्हें कुछ और वरिष्ठ नेताओं का सहयोग मिल रहा था। ऐसी संभावना जताई गई है कि उनमें से कई नेताओं को जल्द ही उनके पदों से रिटायर कराया जाने वाला है। वेबसाइट एशिया टाइम्स ने एक विश्लेषण में कहा गया है कि शी जिनपिंग ने पार्टी में अपनी ऐसी हैसियत बना ली है, जिसमें समझा जाता है कि उनके लिए कोई चुनौती नहीं है। उनकी हैसियत की तुलना माओ जे दुंग से की जाती है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसीलिए ताजा घटनाएं पार्टी के अंदर चल रही किसी हलचल का संकेत हैं। अटकलें लगाई गई हैं कि पार्टी का एक हिस्सा उन सुधारों के खिलाफ है, जिन्हें शी उत्साह के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। खासकर 2035 तक देश में ‘कानून का शासन’ लागू करने के शी के इरादे को लेकर पार्टी में गहरा विरोध है। एक खेमे को अंदेशा है कि ऐसा हुआ तो उनका रसूख खत्म हो जाएगा।