स्टीफन विलियम हॉकिंग ने दुनिया को अपने कई शोधों से बार बार चौंकाया। वह इतने हिम्मती थे कि डॉक्टरों द्वारा जिंदगी के दो साल बताए जाने के बाद उन्होंने अपनी मौत को कई बार धोखा दिया। और बुधवार को 76 साल की उम्र में इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। स्टीफन का जन्म 8 जनवरी 1942 को इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में हुआ था। बचपन से मेधावी स्टीफन ने सोच लिया था कि वह अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहते थे। उन्होंने 20 वर्ष की आयु में कैंब्रिज कॉस्मोलॉजी विषय को शोध के लिए चुना और इस विषय पर पीएचडी भी की।
महज 21 वर्ष की उम्र में हॉकिंग की छाप विश्वविद्यालय में पड़ने लगी थी। उसकी आंखों में सैकड़ों सपने थे। लेकिन एक दिन जब छुट्टियों में घर पर थे और सीढ़ियां उतर रहे थे तभी उन्हें बेहोशी का एहसास हुआ और वो नीचे गिर गए।
डॉक्टरों ने एक गंभीर बीमारी होने के संकेत दिए। मोटोर न्यूरॉन एक गंभीर और असाध्य बीमारी का पता चला जिसमें शरीर लकवाग्रस्त हो जाता है और सारे अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देता है। उनकी उम्र महज दो साल ही बताई गई..लेकिन मौत को मात देते हुए हॉकिंग ने 50 साल से ज्यादा जिंदगी जी।