फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्टीफन हॉकिंग को क्या बीमारी थी और वो उनसे कैसे हार गई?

Wed, 14 Mar 2018 12:45 PM IST
बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
stephen Hawking - फोटो : HAWKING.ORG.UK
विज्ञापन
21 साल का एक नौजवान जब दुनिया बदलने का ख्वाब देख रहा था तभी कुदरत ने अचानक ऐसा झटका दिया कि वो अचानक चलते-चलते लड़खड़ा गया। शुरुआत में लगा कि कोई मामूली दिक्कत होगी लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद एक ऐसी बीमारी का नाम बताया जिसने इस युवा वैज्ञानिक के होश उड़ा दिए।
विज्ञापन


ये स्टीफन हॉकिंग की कहानी हैं जिन्हें 21 साल की उम्र में कह दिया गया था कि वो दो-तीन साल ही जी पाएंगे। साल 1942 में ऑक्सफोर्ड में जन्मे हॉकिंग के पिता रिसर्च बॉयोलॉजिस्ट थे और जर्मनी की बमबारी से बचने के लिए लंदन से वहां जाकर बस गए थे।

कब पता चला बीमारी का?

हॉकिंग का पालन-पोषण लंदन और सेंट अल्बंस में हुआ और ऑक्सफोर्ड से फिजिक्स में फर्स्ट क्लास डिग्री लेने के बाद वो कॉस्मोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट रिसर्च करने के लिए कैम्ब्रिज चले गए। साल 1963 में इसी यूनिवर्सिटी में अचानक उन्हें पता चला कि वो मोटर न्यूरॉन बीमारी से पीड़ित हैं।
विज्ञापन


कॉलेज के दिनों में उन्हें घुड़सवारी और नौका चलाने का शौक था लेकिन इस बीमारी ने उनका शरीर का ज्यादातर हिस्सा लकवे की चपेट में ले लिया। साल 1964 में वो जब जेन से शादी करने की तैयारी कर रहे थे तो डॉक्टरों ने उन्हें दो या ज्यादा से ज्यादा तीन साल का वक्त दिया था। लेकिन हॉकिंग की किस्मत ने साथ दिया और ये बीमारी धीमी रफ्तार से बढ़ी। लेकिन ये बीमारी क्या थी और शरीर को किस तरह नुकसान पहुंचा सकती है?

 

विज्ञापन

बीमारी का नाम क्या?

stephen Hawking
इस बीमारी का नाम है मोटर न्यूरॉन डिसीज (MND)। एनएचएस के मुताबिक ये एक असाधारण स्थिति है जो दिमाग और तंत्रिका पर असर डालती है। इससे शरीर में कमजोरी पैदा होती है जो वक्त के साथ बढ़ती जाती है। ये बीमारी हमेशा जानलेवा होती है और जीवनकाल सीमित बना देती है, हालांकि कुछ लोग ज्यादा जीने में कामयाब हो जाते हैं। हॉकिंग के मामले में ऐसा ही हुआ था।

इस बीमारी का कोई इलाज मौजूद नहीं है लेकिन ऐसे इलाज मौजूद हैं जो रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने वाले इसके असर को सीमित बना सकते हैं।

क्या लक्षण हैं बीमारी के?

इस बीमारी के साथ दिक्कत ये भी कि ये मुमकिन है कि शुरुआत में इसके लक्षण पता ही न चलें और धीरे-धीरे सामने आएं।

इसके शुरुआती लक्षण ये हैं:

एड़ी या पैर में कमजोरी महसूस होना। आप लड़खड़ा सकते हैं या फिर सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत हो सकती है
बोलने में दिक्कत होने लगती है और कुछ तरह का खाना खाने में भी परेशानी होती है
पकड़ कमजोर हो सकती है। हाथ से चीजें गिर सकती हैं। डब्बों का ढक्कन खोलने या बटन लगाने में भी परेशानी हो सकती है
मांसपेशियों में क्रैम्प आ सकते हैं
वजन कम होने लगता है। हाथ और पैरों की मांसपेशी वक्त के साथ पतले होने लगते हैं।
रोने और हंसने को काबू करने में दिक्कत होती है
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें