एक दशक पहले जब चीन ने गूगल, फेसबुक और यूट्यूब जैसी नामी कंपनियों पर रोक लगाई थी, तब उसने शायद ही सोचा होगा कि एक दिन ऐसा ही हश्र उसे भी झेलना पड़ेगा। पिछले साल अमेरिका ने 5जी कंपनी हुवावे और अब भारत ने 59 चीनी मोबाइल एप बंद करके ड्रैगन को उसी के अंदाज में सख्त जवाब दिया है। साइबर जानकारों का कहना है कि चीन वर्षों से कई देशों के साथ ऐसा करते आया है। अब उसका वास्तविकता से सामना होने लगा है।
टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म ने व्यापक वैश्विक लोकप्रियता हासिल की। लेकिन चीन के खराब होते कूटनीतिक रिश्तों से ये कंपनियों भी अछूती नहीं रहने वाली। ड्रैगन को आभास होने लगा है कि वह जैसा कर सकता है, वैसा दुनिया को भी उसके साथ करने का अधिकार है। इसकी बड़ी शुरुआत भारत ने कर दी है।