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कनाडा: कामयाब नहीं हुआ ट्रूडो का दांव, चुनाव से सियासी सूरत नहीं बदली

Tue, 21 Sep 2021 02:59 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटावा

सार

ट्रूडो की लिबरल पार्टी को 2019 के चुनाव में 338 सदस्यीय सदन में 157 सीटें मिली थीँ। लेकिन उनकी पार्टी इसमें सिर्फ एक सीट का इजाफा कर पाई। जबकि उसके वोट प्रतिशत में एक फीसदी की गिरावट आ गई है। 
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, एनडीपी (लेफ्ट) के नेता जगमीत सिंह और कंजर्वेटिव पार्टी के नेता एरिन ओ टूल। (बाएं से दाएं) - फोटो : Social Media
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विस्तार
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ओटावा कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का मध्यावधि चुनाव कराने का दांव कामयाब नहीं हुआ। उनके लिए राहत की बात सिर्फ यह है कि उनके हाथ से प्रधानमंत्री की कुर्सी नहीं निकली। ट्रूडो ने समय से दो साल पहले कनाडा की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा का चुनाव कराने का दांव बाहर से समर्थन दे रही न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी से पीछा छुड़ाने के लिए लगाया था। लेकिन एक बार फिर उन्हें अब किसी दूसरी पार्टी के समर्थन से ही सरकार बनानी होगी।

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ट्रूडो की लिबरल पार्टी को 2019 के चुनाव में 338 सदस्यीय सदन में 157 सीटें मिली थीं। लेकिन उनकी पार्टी इसमें सिर्फ एक सीट का इजाफा कर पाई। जबकि उसके वोट प्रतिशत में एक फीसदी की गिरावट आ गई है। पिछली बार उसे 33.1 प्रतिशत वोट मिले थे। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी ने अपना वोट प्रतिशत तो बरकरार रखा, लेकिन सीटों के मामले में उसे नुकसान उठाना पड़ा है। वैसे इस बार भी दो साल पहले की तरह सबसे ज्यादा वोट कंजरवेटिव पार्टी को ही मिले हैं। उसे 34 फीसदी वोट मिले हैं।

जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के वोट में एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई, लेकिन वह अपनी सीटों में खास इजाफा नहीं कर पाई। नतीजतन, इस बार भी सदन में उसकी ताकत पहले जैसी ही रहेगी।  एनडीपी कनाडा की सर्वाधिक वामपंथी रुझान वाली पार्टी है। बीते दो साल में उसके दबाव में ट्रूडो सरकार को जन कल्याण की कई खास योजनाएं लागू करनी पड़ी थीं। खास कर कोरोना महामारी के दौरान लोगों को राहत पहुंचाने के लिए एनडीपी की तरफ से रखी गई उदार मांगों को उसे मानना पड़ा था। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ऐसे दबाव से पीछा छुड़ाने के लिए ट्रूडो ने महामारी के बीच मध्यावधि चुनाव कराने की चाल चली। लेकिन लोगों ने इसे पसंद नहीं किया।
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शुरुआती विश्लेषकों मे कहा गया है कि अगर चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में कंजरवेटिव पार्टी को बढ़त नहीं दिखाई जाती, तो एनडीपी को और भी अधिक सफलता मिल सकती थी। लेकिन कंजरवेटिव सरकार बनने की आशंका के कारण बहुत से वामपंथी मतदाताओं ने लिबरल पार्टी को वोट दिया। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में एलडीपी को तकरीबन 20 प्रतिशत वोट मिलने की संभवना जताई गई थी। जबकि उसे पौने 18 प्रतिशत वोट ही मिले। 2019 में एनडीपी को 16 प्रतिशत वोट मिले थे।

कंजरवेटिव पार्टी के नेता एरिन ओ’टूल ने अपनी हार मान ली है। उधर ट्रूडो ने दावा किया कि देश की जनता ने उन्हें फिर शासन चलाने का जनादेश दिया है। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि 49 वर्षीय ट्रूडो जिस मंशा से समय से दो साल पहले नया जनादेश मांगा था, वह उन्हें नहीं मिल पाया है। टीवी चैनल कनाडा ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के एक विश्लेषण में कहा गया है कि ट्रूडो ने मध्यावधि चुनाव का दांव इसलिए खेला, क्योंकि कोविड-19 महामारी संभालने में उनकी भूमिका की तारीफ हो रही थी। इसलिए जनमत सर्वेक्षणों में उनके लिए समर्थन बढ़ा हुआ दिख रहा था। लेकिन इसका चुनावी फायदा उठाने की उनकी कोशिश को देश के लोगों ने पसंद नहीं किया।

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