विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियों के निर्माण का फैसला इसलिए किया गया, क्योंकि वे अधिक तेजी से चलती हैं और ज्यादातर देर तक पानी के अंदर रह सकती हैं। उनके बारे में सुराग लगना मुश्किल बना रहता है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मॉरीसन ने इस समझौते को 1951 में हुई सुरक्षा संधि के बाद ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी सबसे बड़ी पहल बताया है। 1951 की संधि में ऑस्ट्रेलिया के अलावा न्यूजीलैंड और अमेरिका शामिल हुए थे।
जानकारों के मुताबिक नई पनडुब्बियां बन कर तैयार होने में 15 से 18 साल तक का वक्त लगेगा। जबकि ऑस्ट्रेलिया के सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के पास अपनी सुरक्षा तैयारी करने के लिए इतना अधिक समय उपलब्ध नहीं है। लेबर पार्टी के मौजूदा नेता एंथनी अल्बानीज को बुधवार को ताजा करार के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। लेकिन लेबर पार्टी के कई सांसदों ने इसको लेकर संदेह जताया है। पार्टी के सांसद जोश बर्न्स ने कहा है कि स्कॉट मॉरीसन कोविड-सेफ एप का ठीक से संचालन सुनिश्चित नहीं कर पाए। इसके बावजूद लोग अपेक्षा कर रहे हैं कि वे परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियां तैयार करवा लेंगे।
ग्रीन पार्टी के नेता एडम बैंड्ट ने इस पहल को खतरनाक बताते हुए कहा है कि ऑस्ट्रेलिया अपने लिए समुद्र में तैरता चेर्नोबिल तैयार करवाने जा रहा है। चेर्नोबिल सोवियत संघ का परमाणु संयंत्र था, जो हादसे का शिकार हो गया था।