इस साल की गर्मियों में रूस सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था संबंधी आंकड़े जारी किए। उससे पता चला कि रूस की अर्थव्यवस्था लगातार तेल और गैस पर कम निर्भर होती जा रही है। इस साल के पहले छह महीनों में रूस के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तेल उद्योग का हिस्सा घट कर सिर्फ 15 फीसदी रह गया। जबकि एक साल पहले ये हिस्सा 20 फीसदी था। 2014 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में अचानक भारी गिरावट आ जाने से रूस की अर्थव्यवस्था की लड़खड़ा गई थी। तब से रूस ने मैनुफैक्चरिंग, केमिकल्स उत्पादन और भारी उद्योग पर अधिक ध्यान देना शुरू किया। उसका लाभ हुआ है। रूस सरकार का दावा है कि कच्चे तेल से जुड़े संकट का अब उसकी अर्थव्यवस्था पर पहले जैसा प्रभाव नहीं होगा।
कुछ हफ्ते पहले रूस ने कई कार्यदलों के गठन का एलान किया था। उन्हें इस बात की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अर्थव्यवस्था की निर्भरता पेट्रोकेमिकल्स पर घटाने और ग्रीन एऩर्जी के अधिक से अधिक उपयोग का रास्ता सुझाएं। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री आंद्रेय बेलोसोव के नेतृत्व में ये पहल हुई है। बेलोसोव के मुताबिक मकसद ऐसा तरीका ढूंढना है, जिससे जीवाश्म ऊर्जा (फॉसिल फ्यूअल) से ग्रीन ऊर्जा की तरफ जाना रूस के लिए खतरे का नहीं, बल्कि अवसरों से भरा एक मौका बन जाए।