सिंगापुर में एस राजरत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (आरएसआईएस) में एसोसिएट रिसर्च फेलो अब्दुल बासित का कहना है कि पाकिस्तान और तालिबान के संबंध सामरिक भिन्नताओं पर आधारित सुविधाओं का मेल हैं। पाकिस्तान के लिए तालिबान की मदद करके भारत को अफगानिस्तान से बाहर रखना था। तालिबान के लिए, यह अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की उपस्थिति का विरोध करना था और पाकिस्तानी मदद का फायदा लेकर इसे अफगानिस्तान से बाहर करना था। जो कि आखिरकार वह करने में पूरी तरह सफल रहा।
बासित कहते हैं कि सुविधाओं के इस मेल के अलावा पाकिस्तान और तालिबान के संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव, असहमतियां और विभिन्नताएं हैं। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, इस्लामाबाद पूर्वी अफगानिस्तान में हजारों पाकिस्तानी तालिबान लड़ाकों के खिलाफ तालिबान की कार्रवाई की कमी से निराश था।' बता दें कि दो जुलाई को पाकिस्तान के राजनेताओं की एक गोपनीय संसदीय ब्रीफिंग में, आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद ने तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया था।
अब्दुल बासित का कहना है कि तालिबान के लिए आवाज उठा रहे चीन और पाकिस्तान, दोनों को अमेरिका की ओर से बड़ा झटका लग सकता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में एनालिस्ट अस्फंद्यार मीर कहते हैं कि अमेरिका-पाकिस्तान के संबंध तनावपूर्ण बने रहेंगे। वाशिंगटन ने पाकिस्तान से आतंकवाद विरोधी समर्थन और तालिबान पर दबाव बनाने के लिए कहा है। वहीं, बासित के अनुसार, यदि तालिबान जिम्मेदारी से व्यवहार करे और अपनी सरकार संयमित तरीके से चलाए, तो अमेरिका-पाकिस्तान संबंध बिना किसी सुधार के बने रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि चीनी विश्लेषकों ने भी चीन के लिए कुछ ऐसी ही चेतावनी दी है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के पूर्व मुख्य संपादक वांग शियांगवेई के अनुसार अफगानिस्तान में अमेरिका का सबसे बड़ा युद्ध विनाशकारी हार के रूप में समाप्त हुआ है और इससे चीन को बिगड़े द्विपक्षीय संबंधों के समय अमेरिका के खिलाफ प्रचार का एक मौका मिला है। उनका कहना है, 'चीनी आधिकारिक मीडिया और टिप्पणीकार अफगानिस्तान में अमेरिका की हार का मजाक उड़ाते रहे हैं, एक ऐसा देश जिसे 'साम्राज्यों के कब्रिस्तान' के रूप में जाना जाता है।
वांग कहते हैं कि इस बात में कोई संशय नहीं है कि चीनी दृष्टिकोण से, अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के लौटने से चीन को अधिक भू-राजनीतिक लाभ हैं। लेकिन, अमेरिकी वापसी न केवल क्षेत्रीय स्थिरता और शक्ति संतुलन में अनिश्चितता और जोखिम पैदा करेगी बल्कि इससे अमेरिका को चीन का मुकाबला करने के लिए संसाधनों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। वांग आगे कहते हैं कि जाहिर है कि अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की वापसी से चीन के लिए बेहतर अवसर और जोखिम दोनों की स्थितियां उत्पन्न हुई हैं।