विदेश मंत्री जयशंकर ने शुक्रवार को कहा, चीन से जुड़े घटनाक्रम से निपटने के लिए भारत के पास द्विपक्षीय विकल्प समेत कई रास्ते हैं। इस संबंध में हम अपने हितों के हिसाब से प्रतिक्रिया देंगे।
अमेरिका-भारत सामरिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेशमंत्री ने कहा, चीन के बारे में हम सभी को विचार करना है तथा हममें से सभी के चीन के साथ समग्र संबंध हैं। कई मायनों में चीन आज एक बड़ा खिलाड़ी देश है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में हमारी समस्या या हमारे अवसर वैसे नहीं हो सकते हैं, जैसे अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया, जापान या इंडोनेशिया या फ्रांस के होंगे। ये हर देश के लिए अलग-अलग होंगे और चीन से जुड़े मसलों का अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर बहुत प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में हमें अपने हितों के अनुरूप मूल्यांकन करना है और प्रतिक्रिया देनी हैं।
क्वाड पर चीन की प्रतिक्रिया पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सहभागी वाला गठबंधन क्वाड किसी देश के खिलाफ नहीं है और किसी तरह की गुटबंदी और नकारात्मक पहल के तौर पर इसे नहीं देखा जाना चाहिए।
तालिबान संग करार से पहले भारत को भरोसे में नहीं लिया
अफगानिस्तान के हालात पर जयशंकर ने अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, दोहा में तालिबान के साथ करार के संबंध में अमेरिका ने इस समझौते के कई आयामों को लेकर भारत को भरोसे में नहीं लिया। विदेश मंत्री ने कहा, भारत के लिए प्रमुख चिंता यह है कि क्या अफगानिस्तान में समावेशी सरकार होगी और उस देश की सरजमीं का इस्तेमाल किसी दूसरे देश या बाकी दुनिया के खिलाफ आतंकवाद के लिए तो नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा, भारत काबुल की नई सरकार को मान्यता देने के लिए जल्दबाजी में नहीं है। पूर्व अमेरिकी राजदूत फ्रैंक बाइजनर के साथ संवाद सत्र में विदेश मंत्री का कहना था कि अफगानिस्तान से जुड़े मसलों पर भारत-अमेरिका की सोच काफी हद तक समान है।