केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के बजट में करीब 1,600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करते हुए कुल 22,119 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत की Neighbourhood First Policy, क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक प्राथमिकताओं का साफ संदेश भी दिया गया है। बजट के बंटवारे से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत ने अपने पड़ोस में “दोस्ती, दबाव और रणनीतिक संतुलन” तीनों को एक साथ साधने की कोशिश की है।
अफगानिस्तान: ‘पक्के दोस्त’ के लिए खजाना खुला
अफगानिस्तान के लिए बजट में सबसे अहम बढ़ोतरी देखने को मिली है। काबुल के लिए आवंटन 50 करोड़ रुपये बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये कर दिया गया है। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम सिर्फ मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में एक स्पष्ट संकेत भी है।
भारत की अफगानिस्तान में सक्रियता चाहे वह खाद्यान्न, स्वास्थ्य सेवाएं या विकास परियोजनाएं हों पाकिस्तान के लिए असहजता बढ़ाने वाली मानी जा रही है। काबुल में भारत की बढ़ती मौजूदगी इस्लामाबाद की पारंपरिक ‘स्ट्रैटेजिक डेप्थ’ नीति को सीधी चुनौती देती है। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान में भारत की भूमिका मजबूत होने से पाकिस्तान की क्षेत्रीय पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
बांग्लादेश: सहयोग पर ब्रेक, बजट में कटौती
बजट के जरिए सबसे कड़ा संदेश बांग्लादेश को दिया गया है। ढाका से जुड़े मामलों के लिए आवंटन 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसकी वजह पिछले वित्त वर्ष में आवंटित राशि का पूरा इस्तेमाल न हो पाना बताया जा रहा है।
हालांकि कूटनीतिक संकेत इससे कहीं आगे जाते हैं। जानकारों का कहना है कि भारत अब बांग्लादेश के साथ सहयोग को सीमित और सशर्त दायरे में रखना चाहता है। हालिया राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों के बीच यह कटौती “कर्मों की सजा” के तौर पर देखी जा रही है।
मालदीव: रिश्तों में ठंडक का असर
मालदीव के लिए भी बजट में 50 करोड़ रुपये की कटौती की गई है और कुल आवंटन 550 करोड़ रुपये तय किया गया है। बीते कुछ समय से माले और नई दिल्ली के रिश्तों में आई तल्खी का असर इस बजटीय फैसले में साफ नजर आता है। भारत ने संकेत दिया है कि पड़ोस में सहयोग तभी मजबूत रहेगा, जब रणनीतिक विश्वास भी बना रहेगा।
नेपाल और भूटान: चीन को जवाब, भारत का बड़ा निवेश
MEA बजट का सबसे मजबूत और स्पष्ट संदेश नेपाल और भूटान को लेकर सामने आया है। नेपाल के लिए आवंटन 100 करोड़ रुपये बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, भूटान को 2,288 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आवंटन मिला है।
यह बढ़ोतरी ऐसे वक्त पर हुई है, जब चीन नेपाल और भूटान में इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश परियोजनाओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा था। भारत के इस कदम को बीजिंग की रणनीति का सीधा जवाब माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे न सिर्फ भारत-नेपाल-भूटान संबंध मजबूत होंगे, बल्कि चीन की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं पर भी लगाम लगेगी।
श्रीलंका: संकट से उबरने में भारत का सहारा
आर्थिक संकट से जूझ चुके श्रीलंका के लिए भी भारत ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। कोलंबो के लिए आवंटन 100 करोड़ रुपये बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह सहायता श्रीलंका की आर्थिक स्थिरता और भारत-श्रीलंका साझेदारी को मजबूत करने में अहम मानी जा रही है।
कूटनीति का नया संतुलन
कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय के बजट का यह ढांचा साफ दिखाता है कि भारत ने पड़ोस में मानवीय सहयोग, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक संदेश—तीनों को एक साथ साधने की कोशिश की है। MEA बजट 2026 सिर्फ वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की बदलती क्षेत्रीय कूटनीति का रोडमैप बनकर सामने आया है।