जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक का करीब 5 किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग खतरे से खाली नहीं है। रास्ते में कई स्थानों पर जर्जर चट्टानें और झूलते हुए बोल्डर लटके हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही जोखिमभरी बनी हुई है। तीर्थ पुरोहित आशुतोष उनियाल के अनुसार कई स्थानों पर मार्ग खोखला हो चुका है और वहां एंगल के सहारे आवाजाही करवाई जा रही है।चारधाम यात्रा के इस व्यस्त मार्ग पर कहीं भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को खतरे का अंदेशा तक नहीं हो पाता। प्रशासन की लापरवाही से हर पल बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। यात्रा सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।