टिहरी जिला मुख्यालय नई टिहरी से लेकर गांवों तक आज उत्तराखंड का लोक पर्व इगास बग्वाल (बूढ़ी दीपावली) की धूम रही। बौराड़ी स्टेडियम में नवयुवक अभिनय श्रीरामकृष्ण लीला समिति, टिहरी सांस्कृतिक समिति, नगर पालिका और जिला प्रशासन की पहल पर इगास बग्वाल का सामूहिक आयोजन किया गया। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजन दाल के पकौड़े और स्वांले तैयार किए। वहीं, स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच रंगोली और दीपोत्सव प्रतियोगिताएं कराई गईं। जिनके विजेताओं को सम्मानित किया गया। शाम होते ही मैदान में पारंपरिक भैलो खेलने की शुरुआत हुई। भैलो खेले बिना इगास अधूरी मानी जाती है। ढोल-दमाऊं की थाप और लोकगीतों की लय पर लोगों ने झूमकर पर्व का आनंद लिया। वीर भड़ माधो सिंह भंडारी पर आधारित नृत्य नाटिका कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। कहा जाता है कि 17वीं सदी में टिहरी जिले के कीर्तिनगर ब्लॉक के मलेथा गांव निवासी वीर माधो सिंह भंडारी जब तिब्बत की लड़ाई लड़ने गए थे, तब दीपावली नहीं मनाई गई थी। लेकिन जब वह विजय प्राप्त कर लौटे, तो पूरे गढ़वाल ने दीप जलाकर खुशी मनाई। उसी दिन से कार्तिक एकादशी को इगास बग्वाल मनाने की परंपरा शुरू हुई। माधो सिंह भंडारी छोटी उम्र में ही शाही सेना में भर्ती हो गए थे। उनकी वीरता से प्रभावित होकर राजा महिपत शाह ने उन्हें सेनाध्यक्ष नियुक्त किया। उनके नेतृत्व में गढ़वाल की सेना ने तिब्बत के दावा क्षेत्र तक विजय पताका फहराई थी।