छठे राज्यवित्त आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त मुख्य सचिव एन रविशंकर ने कहा कि जिले में औद्योगिकीकरण से शहरीकरण हो रहा है, इसलिए नगर निकायों को भूमि प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा और भविष्य के 20 वर्ष आगे की जनसंख्या के आधार पर कार्ययोजना बनाकर कार्य किए जाएं। ताकि शहरों का नियोजित विकास हो सकें। शुक्रवार को जिला सभागार में राज्यवित्त आयोग की टीम ने नगर निकाय और त्रि-स्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की बैठक ली। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि सभी निकाय आय सृजन करने वाली योजना का प्रस्ताव प्रस्तावित करें, ताकि निकाय अपनी आय बढ़ाकर आत्मनिर्भर हो सकें। नगर आयुक्त रुद्रपुर नरेश चंद्र दुर्गापाल ने बताया कि निगम को विभिन्न स्रोतों से आय कम होती है और व्यय अधिक होता है। उन्होंने वेंडिंग जोन, कूड़ा निस्तारण, कूड़े से विद्युत उत्पादन, श्वान पशुओं का बधियाकरण, नजूल भूमि आवंटन, गोशाला निर्माण आदि के बारे में विस्तार से जानकारियां दी। त्रि-स्तरीय पंचायत प्रशासकों और सदस्यों के साथ विचार-विमर्श करते हुए आयोग के अध्यक्ष रविशंकर ने कहा कि सभी त्रिस्तरीय पंचायतें क्षेत्र के समेकित विकास के लिए आपसी समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करें। ताकि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत का सर्वांगिण विकास हो सकें। सभी निकाय अपने संपत्तियों के रखरखाव में विशेष ध्यान दें। ताकि योजनाएं दीर्घकाल तक चले और जनता को योजनाओं का अधिक समय तक लाभ मिल सकें। इस दौरान प्रतिनिधियों ने 2011 की जनगणना के हिसाब से दी जाने वाली राज्यवित्त की धनराशि में बदलाव करने का सुझाव दिया।